लखनऊ. 2022 विधानसभा चुनाव के एक साल पहले ही उत्तर प्रदेश भाजपा में उथल पुथल है. पार्टी का एक धड़ा पूरी कोशिश में है कि राज्य में नेतृत्व बदला जाए. हालाँकि पार्टी के नेता इस बात से इनकार कर रहे हैं. जिस तरह से चर्चाओं के बाज़ार गर्म हैं उससे ऐसा नहीं लगता कि ये सब महज़ अफ़वाह है.

ख़बर है कि राजधानी लखनऊ में बीजेपी में संगठन और सरकार में बदलाव के कयासों के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष (BL Santhosh) ने लगातार तीन दिन तक पार्टी नेताओं से चर्चाएँ कीं. ये चर्चाएँ 56 घंटे तक चलीं. अलग-अलग तरह के मुद्दों पर चर्चा हुई और मंत्रियों, विधायकों तथा सांसदों से फ़ीडबैक लिया गया.

आख़िर में पार्टी कोर कमेटी की बैठक कर बीएल संतोष उत्तर प्रदेश सरकार और संगठन से जुड़ा फीडबैक लेकर वापस दिल्ली लौट गए हैं, जहां यूपी से मिले फीडबैक से शीर्ष नेतृत्व को अवगत कराया जाएगा. इस दौरान कयासबाजी का दौर जारी रहा, इस कयासबाज़ी को ख़त्म करने के लिए संतोष ने एक ट्वीट कर दिया जिसमें इन अफवाहों को ख़ारिज किया गया. इसके बाद भी अफवाहें लगातार जारी ही रहीं.

बीएल संतोष के मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों से मिलने का सिलसिला शुरू हुआ तो सबसे पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की. मुलाकात के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने पार्टी के विधानसभा चुनावों में जबर्दस्त जीत दोहराने की बात भी कही. इसके बाद यूपी के दूसरे उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने बीएल संतोष से मुलाकात की. फिर एक-एक करके श्रीकांत शर्मा, सिद्धार्थ नाथ सिंह, स्वामी प्रसाद मौर्य, अनिल राजभर, रमापति शास्त्री और दूसरे नेताओं ने मुलाकात की. सूत्रों के मुताबिक इन मुलाकातों में कई सवालों के जरिये बीएल संतोष ने मंत्रिमंडल के सदस्यों के जरिये यूपी की नब्ज को टटोलने की कोशिश की.

बैठकों के बीच बीएल संतोष ने कुछ ट्वीट किए. मंगलवार और बुधवार सुबह उन्होंने एक-एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “उत्तर प्रदेश में कोरोना के नए मामलों में 93% तक की कमी आई है. 20 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पांच हफ्ते में जिस प्रभावी ढंग से कोरोना पर काबू पाया है, वह काम 1.5 करोड़ वाले छोटी से म्यूनिसिपलिटी के मुख्यमंत्री करने में असफल रहे.”

ऐसा कहा जा रहा है कि जो रिपोर्ट मिली है वो पार्टी के लिए कोई बहुत भरोसे की नहीं है. इसलिए अभी भी कयास रुके नहीं हैं. बड़े स्तर पर सरकार में बदलाव की संभावना है. अब ये देखने की बात होगी कि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व क्या फ़ैसला लेता है.

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