आज़म ख़ान के जेल से निकलते ही अखिलेश यादव देंगे सबसे बड़ा पद? अब होगा फ़ैसला..

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान को लेकर सूबे की सियासत तेज़ है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की कई सपा नेता आलोचना कर रहे हैं कि उन्होंने आज़म को जेल से बाहर निकालने के लिए बेहतर कोशिश नहीं की. आज़म समर्थकों का मानना है कि ठीक तरह से आज़म की पैरवी न होने की वजह से आज आज़म जेल में हैं.

असल में आज़म ख़ान यूँ तो कई मामलों में आरोपी हैं लेकिन जानकार मानते हैं कि अधिकतर आरोप छोटे मोटे हैं और आसानी से ज़मानत मिल जाती है. आज़म ख़ान पिछले 2 साल से जेल में बंद हैं और अब ये बातें सपा के कुछ नेता खुलकर करने लगे हैं कि आज़म को जेल से छुड़ाने के लिए अखिलेश यादव को जो मेहनत करनी थी उन्होंने नहीं की.

बात तो यहाँ तक हुई कि अखिलेश को आज़म के लिए प्रदर्शन तो करना ही चाहिए था लेकिन अखिलेश ने ऐसा कुछ नहीं किया. विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ऐसा लगा कि आज़म को अखिलेश प्रदेश लाकर बड़ा पद देंगे. आज़म लोकसभा सांसद थे लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद सपा ने लोकसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दिलवाया.

जब अखिलेश ने आज़म की लोकसभा सदस्यता छुड़वाई तो लगा कि अखिलेश यादव आज़म को नेता प्रतिपक्ष बनाएँगे. इसके पीछे कारण ये भी था कि जब मुलायम चुनाव हारे थे तो उन्होंने भी आज़म को नेता प्रतिपक्ष बनाया था. ऐसे में इस तरह की अटकलें तेज़ हो गईं. परन्तु अखिलेश ने ख़ुद ही नेता प्रतिपक्ष बनने का फ़ैसला किया.

उनके इस फ़ैसले के बाद आज़म समर्थकों की नाराज़गी बढ़ गई. इसका कारण ये भी था कि आज़म समर्थक मानते हैं कि अगर आज़म नेता प्रतिपक्ष होते तो उनके लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ना आसान होता. आज़म ख़ान को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया गया तो विरोध तेज़ हो गया. प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव ने आज़म से मुलाक़ात की. शिवपाल यूँ तो सपा विधायक हैं लेकिन सपा से वो ख़ासे नाराज़ हैं.

ऐसी ख़बरें भी तेज़ थीं कि वो भाजपा में जा सकते हैं लेकिन ये सब ख़बरें सही नहीं साबित हुईं. हालाँकि इन ख़बरों के शांत होते ही शिवपाल सपा में ही एक गुट बनाते दिखे. शिवपाल और अखिलेश का झगड़ा पुराना है. यही वजह है कि दोनों गाहे बगाहे एक दूसरे पर कुछ न कुछ टिपण्णी करते रहते हैं. ऐसे में जब शिवपाल आज़म से मिले तो लगा कि शिवपाल कहीं आज़म के साथ मिलकर नया गुट न बना लें.

इसके पहले आज़म से रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी भी मिल चुके हैं. सीतापुर जेल में बंद आज़म से मिलने की बात सपा के एक और सहयोगी ओम प्रकाश राजभर भी कर रहे हैं. भाजपा नेता ब्रज भूषण शरण सिंह ने भी आज़म के प्रति सहानुभूति जताई और कहा कि अगर उनका प्लान बना तो वो भी आज़म ख़ान से मिलने जाएँगे.

इन सब बातों की वजह से अखिलेश यादव पर दबाव तो बन ही रहा है. जब मीडिया ने उनसे सवाल किया कि आज़म को लेकर पार्टी का क्या स्टैंड है तो अखिलेश यादव ने कहा कि सपा उनके साथ खड़ी है. ख़बर है कि अखिलेश यादव अपने क़रीबी लोगों के साथ विचार कर रहे हैं और जल्द ही आज़म से मिलने का प्लान बना रहे हैं.

ऐसा भी माना जा रहा है कि आज़म के जेल से रिहा होते ही पार्टी उन्हें बड़ी ज़िम्मेदारी देगी. कुछ सूत्र बताते हैं कि आज़म ख़ान को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाया जा सकता है. आज़म समर्थक भी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष या विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इनमें से एक पद चाहते हैं. सपा के वो लोग जो आज़म के क़रीब हैं उनका मानना है कि अखिलेश यादव पार्टी को आगे बढ़ाना चाहते हैं लेकिन उनके इर्द-गिर्द चापलूसों की बड़ी फ़ौज खड़ी है जिनका ख़ुद का कोई जनाधार नहीं है.

ऐसे लोग बस चापलूसी करके और जनाधार वाले नेताओं को किनारे लगाकर अपनी राजनीति चमकाए रखना चाहते हैं. इनमें से कई ऐसे हैं जो अपने क्षेत्र में नहीं रहते हैं और लखनऊ में ही अपना डेरा जमाए रहते हैं जबकि न तो ये विधायक हैं और न ही लखनऊ की ज़िम्मेदारी पार्टी ने इन्हें दी है. ये लगातार अखिलेश यादव को चेहरा दिखाते रहते हैं ताकि इनका मामला मज़बूत रहे. आज़म ख़ान जैसे नेताओं को सम्मान देने के अलावा सपा के पुराने नेता चाहते हैं कि इन लोगों को भी पार्टी किनारे लगाये.

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