मलाला युसूफज़ई की ज़िन्दगी पर आधारित फ़िल्म “गुलमकई” रिलीज़ के लिए तैयार है. 31 जनवरी को रिलीज़ होने वाली इस फिल्म के निर्देशक एचई अमजद ख़ान हैं. पिछले दिनों CAA को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देकर पहले ही विवादों में आये अमजद की फिल्म कुछ और बातों को लेकर भी विवाद में आ रही है. कुछ लोगों का आरोप है कि फिल्म में पश्तून समाज के लोगों का चित्रण सही से नहीं किया गया है.

विवाद फिल्म के ट्रेलर के आ जाने के बाद ही शुरू हो गया था. इस ट्रेलर को देखने के बाद पश्तून मुसलमानों ने आपत्ति जताई है. इनका कहना है कि फिल्म में उनके समाज के लोगों का चित्रण ठीक से नहीं किया गया है. असल में फिल्म के ट्रेलर में एक सीन दिखाया गया है जिसमें ये कहा जा रहा है कि हमारे पश्तो क़बीलों में लड़कियों के पैदा होने पर जश्न नहीं मनाया जाता.

इसको लेकर कुछ पश्तो लोगों ने कहा कि ऐसा बिलकुल नहीं है और लड़कियों के पैदा होने पर हम हमेशा ही ख़ुश होते हैं. उन्होंने कहा कि वो इस फिल्म के इस प्रकार के डायलॉग से हैरत में हैं. हालाँकि फिल्म के निर्देशक अमजद ख़ान ने कहा कि जब तक फिल्म देखेंगे नहीं आपको फिल्म का सन्देश नहीं मिलेगा. अमजद कहते हैं कि ये फिल्म मलाला की ज़िन्दगी पर आधारित है और हमने इसको लेकर कड़ी मेहनत की है. अमजद कहते हैं कि फिल्म में किसी की भी भावना को ठेस नहीं पहुंचाई गई है.

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