तुलसीपुर विधानसभा में मशहूद ख़ान और ज़ेबा रिज़वान की लड़ाई में भाजपा को बढ़त? ये है ताज़ा हाल..

तुलसीपुर विधानसभा सीट एक ऐसी सीट है जिसकी चर्चा हमने पहले भी की है। बलरामपुर ज़िले में पड़ने वाली तुलसीपुर विधानसभा सीट कई मायनों में चर्चा का विषय रही है। सपा के पूर्व चेयरमैन फ़िरोज़ पप्पू की हत्या के बाद सियासी हलचल तेज़ हो गई। इस हत्या में जब पूर्व सांसद रिज़वान ज़हीर, उनकी बेटी ज़ेबा रिज़वान और दामाद रमीज़ की गिरफ़्तारी ने जैसे राजनीतिक भूचाल सा ला दिया।

रिज़वान के परिवार ने अपने बेगुनाह होने की बात कही। इस बीच सपा ने टिकट को लेकर चल रही बहस को शांत करते हुए पूर्व विधायक अब्दुल मशहूद ख़ान को टिकट दे दिया। ज़ेबा भी सपा से टिकट की दावेदारी कर रही थीं लेकिन ह’त्यारोपी होने की वजह से सपा ने उनको टिकट न देने का फ़ैसला किया। ज़ेबा ने इसके बाद निर्दलीय प्रत्याशी के बतौर पर्चा भरा।

इसके पहले की चर्चा आगे बढ़ाएं, आपको बता दें कि इस सीट से भाजपा ने मौजूदा विधायक कैलाश नाथ शुक्ला को टिकट दिया है, बसपा ने भुवन प्रताप सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस ने दीपेंद्र सिंह दीपांकर को टिकट दिया है। आम आदमी पार्टी ने यहाँ हिदायतुल्लाह शाह को टिकट दिया है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तुलसीपुर सीट पर जीत हार की लड़ाई सपा और भाजपा के बीच है जबकि निर्दलीय प्रत्याशी ज़ेबा रिज़वान अभी मुक़ाबले में तीसरे नम्बर पर दिख रही हैं। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ज़ेबा चुनाव में इसी वजह से खड़ी हुई हैं कि मशहूद को चुनाव न जीतने दिया जाए।

विश्लेषक इसकी वजह बताते हैं कि जहाँ कैलाश नाथ शुक्ला और मशहूद ख़ान जनता से कह रहे हैं कि अगर वो जीते तो विकास करेंगे वहीं ज़ेबा की ओर से सिम्पैथी कार्ड खेला जा रहा है। ज़ेबा अपने आपको पीड़ित बता रही हैं और उनके समर्थक मानते हैं कि उन्हें बेजा फँसाया गया है।

ज़ेबा और उनके पिता रिज़वान ज़हीर की ओर से उनके एक रिश्तेदार ने क़ुरआन पाक उठाकर क़सम खायी कि उनके परिवार का फ़िरोज़ पप्पू के क़त्ल से कोई लेना देना नहीं है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मुस्लिम वोट उनके पक्ष में आए इसलिए ज़ेबा की ओर से ये क़सम खायी गई। इसका असर कुछ हद तक पड़ा भी लेकिन चुनाव जीतने का कोई सटीक प्लान न होने की वजह से इसकी चर्चा कम होने लगी है।

दूसरी ओर सपा के मशहूद ख़ान ने भी सक्रियता से मुस्लिम समाज को अपने पक्ष में करने के लिए सभा की और सपा के कार्यकर्ताओं को इस ओर सजग किया। मशहूद ने तुलसीपुर के बड़े सपा नेता राजेश्वर मिश्रा के साथ ब्राह्मण समुदाय को अपने पक्ष में एकजुट करने का प्रयास किया। मशहूद समर्थक कहते हैं कि वो किसी स्टंट से दूर रहेंगे और जनता के मुद्दों को ही अपने चुनावी प्रयास में शामिल करेंगे।

मशहूद समर्थक मानते हैं कि उनके पक्ष में यादव समुदाय और मुस्लिम समुदाय की बड़ी आबादी वोट करेगी जबकि राजेश्वर मिश्रा के साथ से ब्राह्मण समुदाय के लोग भी उनके पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

भाजपा प्रत्याशी कैलाश नाथ शुक्ला भी सक्रियता से लोगों के बीच जा रहे हैं। शुक्ला कोशिश में हैं कि उन्हें सामान्य जातियों के वोट अधिक मात्रा में मिलें और कुर्मी बिरादरी भी अधिक संख्या में उन्हें वोट करें। शुक्ला कैम्प मानता है कि मुस्लिम और यादव वोट उनके पक्ष में पड़ने की उम्मीद बहुत कम है, इसलिए बाक़ी जातियों को अपने पक्ष में किया जाए। हालांकि कैलाश नाथ शुक्ला समर्थक कहते हैं कि उनकी ओर से मुस्लिम समुदाय और यादव समाज तक पहुँचने का भी प्रयास किया जा रहा है।

इस विधानसभा सीट पर तक़रीबन 36 फ़ीसदी मुस्लिम वोट है। मुस्लिम वोटों के बाद यादव और ब्राह्मण वोट भी बड़ी आबादी में है, कुर्मी और दलित समुदाय की भी विधानसभा सीट पर अच्छी आबादी है।

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