अचानक दिया भाजपा CM ने इस्तीफ़ा, अमित शाह से कल ही मिले और…

भाजपा ने पिछले सालों में अपनी पार्टी का विस्तार उन राज्यों में भी किया है जहाँ पर उसका नाम लेने वाला कोई नहीं था. असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भाजपा ने सरकार बना ली तो पश्चिम बंगाल में उसने दूसरे नम्बर की पार्टी होने का दर्जा तो पा ही लिया. दक्षिण में भी भाजपा ने अपना विस्तार करने की कोशिश की लेकिन वहाँ भाजपा को बहुत कामयाबी नहीं मिली.

देश के उत्तर पूर्व में पड़ने वाले राज्यों में भाजपा का बढ़ता प्रभाव अब राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. भाजपा के अन्दर नेताओं में अब वो एकजुटता नहीं दिख रही है जो कुछ समय पहले दिखती थी. पश्चिम बंगाल में हाल ही में एक विधानसभा और एक लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ, उपचुनाव में बुरी तरह हारने के बाद पश्चिम बंगाल भाजपा में मतभेद खुलकर सामने आए. कई बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ दी.

पश्चिम बंगाल में भाजपा बग़ावत रोकने की कोशिशें कर रही है लेकिन पास के त्रिपुरा में भी अब हालात पार्टी के लिए अच्छे नहीं दिख रहे. विधानसभा चुनाव से एक साल पहले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने इस्तीफ़ा दे दिया है. उनके कामकाज से भाजपा नेता ख़ुश नहीं थे और माँग कर रहे थे कि इनकी छुट्टी की जाए.

बिप्लब देब ने अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंप दिया है. कल बिप्लब देब ने गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह से मुलाक़ात की थी और आज उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया. अभी तक इस मामले में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि ये आलाकमान के इशारे पर बिप्लब देब ने क़दम उठाया है.

भाजपा नेता जानते हैं कि अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और वामपंथी पार्टी सीपीएम चुनाव की तैयारी अभी से कर चुकी है. लम्बे समय तक त्रिपुरा की सत्ता पर क़ाबिज़ रहने वाली सीपीएम सत्ता में वापसी की पूरी कोशिश करेगी. भाजपा भी इस बात को अच्छी तरह जानती है कि त्रिपुरा में अगर सरकार वापिस बनानी है तो मुक़ाबला कड़ा होगा.

असल में भाजपा मानती है कि देश में उसका सबसे बड़ा वैचारिक विरोधी कोई है तो वो सीपीएम और अन्य साम्यवादी पार्टियाँ हैं. ऐसे में ये चुनाव वैचारिक लड़ाई के बतौर भी देखा जाएगा. इसी कड़ी में आज बिल्पब देब ने इस्तीफ़ा दिया है.

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