मोदी सरकार के मंत्री ने शिवसेना की मांग पर की टिपण्णी, आदित्य ठाकरे को CM नहीं..

October 27, 2019 by No Comments

मुंबई: महाराष्ट्र में कौन बनेगा मुख्यमंत्री पर खींचतान तेज़ है. शिव सेना की मांग इस बार जिस तरह की है उसके बाद भाजपा भी अपनी ओर से पूरी तैयारी करने में जुट गई है. भाजपा भी अब ये जताने में लग गई है कि उनके पास सीटें भी ज़्यादा हैं और वो किसी हाल में मुख्यमंत्री की कुर्सी देने को तैयार नहीं हैं. शिव सेना उस समय और मज़बूती से अपनी मांग करने लगी जब उसके पास दो और विधायकों का समर्थन आ गया.

पर अब ख़बर है कि भाजपा ने इस बात का भी मुक़ाबला करने की ठान सी ली है. भाजपा की बाग़ी नेत्री गीता जैन ने अपना समर्थन भाजपा को दे दिया है. उन्होंने मीरा भायंदर विधानसभा में भाजपा के प्रत्याशी नरेंद्र मेहता को हराया है. उनके समर्थन से भाजपा एक बार फिर शिव सेना को ये बताना चाह रही है कि उसकी पार्टी बड़ी है. ग़ौरतलब है कि प्रहार जनशक्ति पार्टी के दो विधायकों ने शिवसेना को समर्थन दिया है.

इस समर्थन से गदगद शिवसेना के मुखपत्र में संजय राउत ने लिखा है कि भले ही 2014 की अपेक्षा शिवसेना ने इस चुनाव में कम सीटों पर जीत हासिल की है, लेकिन सत्ता का रिमोट अब उद्धव ठाकरे के पास है। इस मामले पर बोलते हुए भाजपा नेता और मौजूदा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाला भाजपा-शिवसेना गठबंधन मज़बूत सरकार देगा.उन्होंने यह बात पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए की.

फडनवीस ने कहा कि सरकार बनाने की प्रक्रिया दिवाली के बाद शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा कि जनता ने जो जनादेश दिया है वो भाजपा-शिवसेना गठबंधन के पक्ष में है. फडनवीस का बयान बहुत अहम् है क्यूँकि शिवसेना इस बात पर अडिग है कि मुख्यमंत्री पद उसे चाहिए. इस बीच भाजपा-शिवसेना के गठबंधन की पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के नेता और मोदी सरकार में मंत्री रामदास अठावले ने बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भाजपा रोटेशनल मुख्यमंत्री पर राज़ी होगी लेकिन उप-मुख्यमंत्री की पुसर शिवसेना को पाँच साल के लिए दी जा सकती है.

उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि शिवसेना को उप-मुख्यमंत्री की पोस्ट आदित्य ठाकरे के लिए एक्सेप्ट कर लेनी चाहिए और देवेन्द्र फडनवीस को मुख्यमंत्री बनना चाहिए.आपको बता दें कि भाजपा को 288 सीटों वाली विधानसभा में 105 सीटें मिली हैं जबकि शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं. इसका अर्थ है कि अगर शिव सेना गठबंधन को तोड़ दे तो सरकार नहीं बन पाएगी. वहीँ इस बीच ऐसी ख़बर आ रही है कि शिव सेना अन्दर अन्दर एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं से भी बात कर रही है. इस चुनाव में कांग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटें मिली हैं जबकि 2 सपा और एक सीपीएम को मिली है.

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