शिवराज के दो मंत्रियों की कुर्सी पर ख’तरा, चुनाव से पहले अगर नहीं बने विधायक तो..

September 12, 2020 by No Comments

मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस से में पूरी जोर आजमाइश चल रही है। हालांकि अभी तक इस विधानसभा उपचुनाव को लेकर कोई ऐलान नहीं किया गया है। ऐसे में शिवराज सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुट में शामिल मंत्री तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत की कुर्सी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

कारण यह है कि यह दोनों मंत्री विधानसभा के सदस्य नहीं है ऐसे में 21 अक्टूबर 2020 तक अगर यह विधानसभा में विधायक नहीं चुने जाते हैं तो उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। दरअसल जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का दामन छोड़ 22 विधायकों के साथ भाजपा की सदस्यता ली थी। तब कमलनाथ सरकार के हाथ से सत्ता चली गई थी।

इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 21 अप्रैल 2020 को अपने मंत्रिमंडल का गठन किया था. शिवराज कैबिनेट में पहले 5 मंत्रियों को शामिल किया गया था। जिनमें सिंधिया के करीबी तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत भी शामिल थे। हालांकि, ये दोनों मंत्री विधायकी से इस्तीफा देकर आए थे।

संविधान की धारा 164 (4) के अनुसार तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को 6 माह में विधानसभा का सदस्य होना अनिवार्य है। तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत ने 21 अप्रैल 2020 को मंत्री पद की शपथ ली थी। 21 अक्टूबर को 6 महीने होने जा रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं को अपने मंत्री पद को बचाए रखने के लिए 21 अक्टूबर से पहले विधानसभा का सदस्य बनना जरूरी है।

इस मामले में सं’विधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप कहते हैं कि बिना विधानसभा का सदस्य चुने हुए केवल छह महीने तक ही कोई मंत्री पद पर बना रह सकता है। ऐसे में उसे 6 महीने के अंदर विधानसभा या फिर विधान परिषद सदस्य के लिए चुना जाना जरूरी है। मध्य प्रदेश में विधान परिषद की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में विधानसभा के उपचुनाव के जरिए चुनकर नहीं आते हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा।

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