अखिलेश और आज़म के साझा दाँ’व से भाजपा में अब तक ख़’लबली, इस वजह से..

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार हो जाने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक ऐसा फ़ैसला लिया जिसकी उम्मीद उनके विरोधी तो नहीं ही रहे थे. सपा की हार के बाद ऐसा कहा जा रहा था कि अखिलेश आज़मगढ़ से लोकसभा सांसद बने रहेंगे और करहल विधानसभा सीट से इस्तीफ़ा दे देंगे.

अखिलेश यादव के समर्थक पहले से ही उनसे माँग कर रहे थे कि अखिलेश को आज़मगढ़ लोकसभा सीट छोड़ देना चाहिए और उत्तर प्रदेश में बने रहना चाहिए. असल में सांसद होने पर नेता को बहुत समय दिल्ली में भी गुज़ारना पड़ता है, ऐसे में राज्य की राजनीति दूसरे नेताओं के हाथ में छोड़नी पड़ती है. अखिलेश का राज्य में रहना इसलिए भी ज़रूरी है क्यूँकि पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविन्द चौधरी अपना चुनाव हार गए हैं और आज़म ख़ान जेल में हैं. 2017-2022 तक राम गोविन्द चौधरी ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे.

बहुत से लोग ये भी कह रहे थे कि सपा इस बार विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता शिवपाल यादव को बना सकती है लेकिन शिवपाल पर भी अखिलेश पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकते. इसकी वजह उनके ख़ुद के कुछ बयान हैं जो उन्होंने चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान दिए. हालाँकि ये ज़रूर है कि पार्टी शिवपाल को बड़ी ज़िम्मेदारी दे सकती है.

अखिलेश यादव के साथ पार्टी के एक और बड़े नेता आज़म ख़ान ने भी लोकसभा से इस्तीफ़ा दे दिया है. वो रामपुर से सांसद थे. आज़म अब रामपुर से विधायक हैं, उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म भी ज़िले की स्वार विधानसभा से विधायक हैं. अब उम्मीद है कि उनकी पत्नी ताज़ीन फ़ातिमा को रामपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है.

इससे फ़ायदा क्या होगा?

बहुत से लोग ये सवाल कर रहे हैं कि आख़िर इससे फ़ायदा होगा क्या? इससे सबसे बड़ा फ़ायदा तो यही होगा कि अखिलेश यादव पूरा समय उत्तर प्रदेश में दे पाएँगे. वो ख़ुद नेता प्रतिपक्ष बनेंगे तो सरकार की नीतियों पर सीधी बहस होगी. अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश में रहने से सपा ने जो गठबंधन बनाया है वो मज़बूत रह पाएगा.

कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा ने सरकार को शपथ दिलाने में इसलिए भी देरी की कि उसे उम्मीद थी कि ओम प्रकाश राजभर या रालोद उसके ख़ेमे में आ सकते हैं. इस तरह की कोशिशें भाजपा आगे भी करेगी लेकिन अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश में रहने से सपा कुछ हद तक भाजपा का मुक़ाबला कर पाएगी. आज़म ख़ान अभी तो जेल में हैं लेकिन उनको अगर ज़मानत मिल जाएगी तो वो भी अखिलेश के साथ सपा को एकजुट कर पाएँगे.

भाजपा को क्यूँ है झटका?
अखिलेश यादव और आज़म ख़ान के फ़ैसले से भाजपा को बड़ा झटका लगा है. भाजपा नेताओं को लग रहा था कि अखिलेश दिल्ली में रहेंगे और ऐसे में 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए ज़मीन तैयार करना आसान होगा. परन्तु अखिलेश और आज़म के लखनऊ में मौजूद रहने से सपा कार्यकर्ता जोश में रहेंगे और भाजपा को हर मुद्दे पर घेरने के लिए सपा सजग रहेगी.

भाजपा को एक झटका ये भी है कि बसपा और कांग्रेस से जो वोटर भाजपा में आए हैं अभी वो पक्के भाजपाई नहीं कहे जा सकते, ऐसे में उन्हें अगर कोई और विकल्प मिला तो वो उधर जा सकते हैं.कुल मिलाकर सपा की ओर से लिया गया ये फ़ैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति में असर ज़रूर दिखाएगा.

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