उत्तर प्रदेश में सियासी बयानबाज़ियों का दौर तो चल ही रहा है. हालाँकि कभी कभी कुछ ऐसा बयान आ जाता है जिसको लेकर चर्चाएँ बढ़ जाती हैं. कुछ इसी तरह का बयान आज़म ख़ान के मीडिया प्रभारी की ओर से दिया गया. अब इस बयान की चर्चा दो दिन तो हो गई लेकिन अब कुछ नहीं हो रही है.

उसकी वजह ये है कि प्रभारी के बयान को आधार मानकर AIMIM जैसी पार्टियों ने आज़म खान से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ. बल्कि AIMIM की ओर से जो भी सिग्नल मिले उस पर आज़म ख़ान के परिवार ने ध्यान भी नहीं दिया. वहीं बसपा और कांग्रेस को भी एहसास हो गया है कि इस मामले में कुछ होने वाला नहीं है.

आपको बता दें कि आज़म खान के मीडिया प्रभारी ने सपा के ख़िलाफ़ कुछ बातें कही थीं जिसके बाद AIMIM की ओर से बयान आया कि आज़म सपा छोड़ दें और AIMIM में आ जाएँ. मुस्लिम राजनीति का दावा करने वाली AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौक़त अली ने तो यहाँ तक कह दिया कि आज़म ख़ान सपा छोड़कर हमारी पार्टी में आ जाएँ और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सम्भालें.

वहीं आज़म ख़ान की नाराज़गी की ख़बरें जैसे ही तेज़ हुईं कांग्रेस पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी इस ओर ध्यान देने लगी. चलिए हम आपको बताते हैं कि आख़िर मामला क्या है और किस बात को लेकर इतना बवाल मचा हुआ है. आज़म ख़ान के मीडिया प्रभारी फ़साहत अली ख़ान ने एक बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव, आज़म ख़ान का नाम तक नहीं लेते हैं.

उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ये बात सही है कि अखिलेश नहीं चाहते कि आज़म जेल से बाहर आएँ. फ़साहत ने बात आगे बढ़ाई और कह दिया कि अब हम चाहते हैं कि आज़म साहब सपा छोड़ दें क्यूँकि सपा ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया. इस पूरे मामले पर अभी तक आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला और उनकी पत्नी ताज़ीन की ओर से कुछ नहीं कहा गया है. वहीं अब सपा के सहयोगी साथ महान दल के अध्यक्ष ने इस सिलसिले में बड़ा बयान दिया है.

केशव देव मौर्य ने इस सिलसिले में अखिलेश यादव का पक्ष लिया और कहा,”मुझे लगता है यह बयान सुर्ख़ियों में बने रहने के लिए दिया गया है। अगर आज़म ख़ान साहब की पत्नी जो पूर्व में सांसद और विधायक रह चुकी हैं या फिर उनके विधायक बेटे ऐसा बयान देते तो मैं मान सकता था। आज़म ख़ान के बेटे विधायक हैं और लोकप्रिय हैं। उनका ऐसा कोई बयान नहीं आया है तो इस तरह की बातें कोई मायने नहीं रखती।”

केशव देव मौर्य ने आगे कहा कि, “आज तक अखिलेश यादव जी के मुंह से मैंने कभी आज़म ख़ान साहब नहीं सुना है, बल्कि उन्होंने हमेशा आज़म ख़ान साहब को ‘आदरणीय आज़म ख़ान साहब’ कह कर संबोधित किया है और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को हमेशा ‘भाई’ कहकर संबोधित किया है। उनको हमेशा अपने भाई की तरह मानते हैं और बराबर अपने बग़ल बैठाते हैं और मिलते हैं। अखिलेश यादव, आज़म ख़ान को गार्जियन की तरह मानते हैं।”

दरअसल समाजवादी पार्टी की ज़िला स्तरीय बैठक में आज़म ख़ान के मीडिया प्रभारी फ़साहत अली ख़ान अचानक ही अखिलेश यादव पर भड़के से नज़र आए. उन्होंने कहा,”अखिलेश यादव को अब हमारे कपड़ों से बदबू आती है। आज़म ख़ान साहब से अखिलेश यादव सिर्फ एक बार जेल में मुलाक़ात करने गए हैं। हमने भाजपा से दुश्मनी कर ली और सज़ा सिर्फ हमें मिल रही है और आप (अखिलेश यादव) मज़े ले रहे हैं।”

फ़साहत अली खान ने कहा कि अब हम आज़म खान साहब से निर्णय लेने के लिए कहेंगे कि वह समाजवादी पार्टी को छोड़ दें। उन्होंने कहा कि आज़म खान साहब ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा विधानसभा में जनता की आवाज उठाने के लिए दिया था, लेकिन नेता प्रतिपक्ष पद के लिए उनके नाम का चयन नहीं किया गया।

आपको बता दें कि फ़साहत के बयान के बाद समाजवादी पार्टी ने आज़म खान के परिवार से पूरे मामले को समझने की कोशिश की है. ख़बरों के मुताबिक आज़म परिवार ने सपा से नाराज़गी न होने की बात कही है. वहीं दूसरी ओर ऐसी भी ख़बरें हैं कि अब सपा आज़म ख़ान को जेल से बाहर लाने के लिए और कोशिशें करेगी. इस सिलसिले में क़ानूनी जानकारों से राय भी ली जा रही है.

अखिलेश यादव के ख़ास सूत्र ये भी बता रहे हैं कि ऐसा संभव है कि लोकसभा चुनाव से पहले सपा आज़म ख़ान को नेता प्रतिपक्ष बना दे. असल में पार्टी के अन्दर मुस्लिम नेता ही नहीं बल्कि यादव नेता भी चाहते हैं कि पार्टी को आज़म या शिवपाल जैसी कार्यशैली की ज़रूरत है. ऐसे में सम्भव है कि आज़म ख़ान को पार्टी नेता प्रतिपक्ष बनाए.