पश्चिम बंगाल में चुनाव ख़त्म हो गए हैं और चुनाव ख़त्म होने के साथ भाजपा के वो दावे कि इस बार राज्य में वो दो सौ से अधिक सीटें जीतेगी भी ख़त्म हो गए हैं. तृणमूल कांग्रेस ने बता दिया है कि पश्चिम बंगाल उनका गढ़ है. ममता बनर्जी एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुकी हैं लेकिन भाजपा और तृणमूल में टकराव अभी ख़त्म नहीं हुआ है.

तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल सरकार केंद्र की मोदी सरकार से टकराव की स्थिति में है. मोदी सरकार और ममता सरकार, दोनों ही एक दूसरे पर इलज़ाम लगा रहे हैं. इधर एक और ख़बर आ रही है कि तृणमूल ने भाजपा को एक और झटका देने का मन बना लिया है. तृणमूल कांग्रेस के सूत्र बता रहे हैं कि उनके संपर्क में भाजपा के 33 विधायक हैं. उनका दावा है कि ये विधायक जल्द ही तृणमूल में आने वाले हैं.

भाजपा इसे अफवाह करार दे रही है लेकिन ये भी सच है कि पश्चिम बंगाल भाजपा पूरी तरह से अस्त-व्यस्त लग रही है. इस मामले को ढंकने की कोशिश भाजपा की तरफ़ से हो रही है. भाजपा प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने इस पूरे मामले को अफवाह करार दिया है।

उन्होंने कहा कि जो लोग मुझे 33 का आंकड़ा दे रहे हैं, मैं उन्हें 72 की तादाद बता रहा हूं, क्योंकि यह दावा झूठा है। दरअसल, सुभ्रांशु के बीजेपी में जाने की अटकलें तब तेज हुईं थीं, जब उन्होंने अपनी एक पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार को निशाने पर ले लिया था. उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि जनता द्वारा चुनी गई सरकार की आलोचना करने के बजाय आत्मनिरीक्षण करना बेहतर है।

बता दें कि सुभ्रांशु रॉय को बीजेपी ने बीजपुर से टिकट दिया था, लेकिन वे जीतने में कामयाब नहीं हो सके। तृणमूल कांग्रेस के सूत्र ये भी कहते हैं कि वो इतनी आसानी से भाजपा में गए नेताओं को वापिस नहीं लेगी.टीएमसी सांसद शुखेंदु शेखर राय के अनुसार शनिवार को दोपहर 3 बजे पार्टी कार्यालय में मीटिंग है। उसमें इस मुद्दे पर भी बात हो सकती है।