पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ जाने के बाद अब इंतज़ार है कि सरकार कब तक बनेगी और क्या NDA की ही सरकार बनेगी या फिर अभी कुछ और सियासत होनी है. ख़बर है कि VIP और ‘हम’ NDA के सामने अपनी बात मज़बूती से रख रहे हैं, वो बार-बार ये मैसेज भेज रहे हैं कि उनके पास दूसरे गठजोड़ की तरफ़ से भी ऑफर है. VIP और ‘हम’ के नेता बहुत कॉन्फिडेंस से ये बातें कह रहे हैं और भाजपा असमंजस में है कि वो क्या करे.

भाजपा की मुश्किल है कि उसने जदयू को CM पद पहले ही दे दिया है और डिप्टी CM पर वो ख़ुद क़ाबिज़ होना चाहती है. ऐसे में VIP और ‘हम’ को ये पद मिलना मुश्किल है. वहीं महागठबंधन में कुछ नेता मानते हैं कि जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद देकर और VIP के मुकेश सहनी को उप-मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता पर क़ाबिज़ हुआ जाए. हालाँकि राजद के कुछ नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री पद तो तेजस्वी यादव को ही मिलना चाहिए. जानकार मानते हैं कि छोटे दलों के लिए फिर भी महागठबंधन में अधिक संभावनाएँ हैं.

‘भारत दुनिया’ की ख़बर के अनुसार, ‘हम’ के नेता जीतन राम मांझी जोकि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के क़रीबी दोस्त हैं, उनके बारे में ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो जल्द ही महागठबंधन में आ सकते हैं. लालू की ओर से माँझी और मुकेश सहनी दोनों को पैग़ाम भेजा गया है और राजद ने कुछ नेताओं को उनसे संपर्क बनाये रखने के लिए कहा है. सूत्रों की मानें तो ‘हम’ और VIP दोनों ने ही राजद को ‘ना’ में जवाब नहीं दिया है. ऐसा माना जा रहा है कि ये दोनों दल NDA के ऑफर का इंतज़ार कर रहे हैं. इन सभी बातों के बीच ‘हम’ प्रवक्ता दानिश रिज़वान ने एक दावा कर दिया है

उन्होंने कहा है कि बिहार में अभी सियासी ड्रामा खत्म नहीं हुआ है. हमारी पार्टी के पास दूसरे दल के लोग फोन कर रहे हैं और गठबंधन करने की बात कह रहे हैं. उन्होंने कहा कि कोई भी पार्टी हमें तोड़ने की कोशिश क्यों न करे लेकिन हम किसी भी क़ीमत पर एनडीए का साथ नहीं छोड़ेंगे. रिज़वान का ये बयान NDA पर दबाव डालने वाला नज़र आ रहा है.

वो हालाँकि कह रहे हैं कि पार्टी प्रवक्ता होने के नाते मैं ये बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं हम किसी भी कीमत पर एनडीए का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हैं. हमारे नेता जीतन राम मांझी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में चुनाव में थी, हम उनके साथ थें और जबतक प्राण है तबतक उनके साथ ही रहेंगें. बात तो मुकेश सहनी की ओर से भी यही हो रही है लेकिन अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि वो अभी NDA के ऑफर का वेट कर रहे हैं, अगर उन्हें मनमर्ज़ी का पद नहीं मिलता है तो वो रास्ता बदल सकता हैं.

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