भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में इस समय राजनीतिक हलचलें तेज़ हैं. इमरान ख़ान की सरकार पर संकट साफ़ दिख रहा है. उनकी सरकार रहेगी या जाएगी इसके लिए अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी लेकिन वोटिंग से पहले 27 मार्च को इस्लामाबाद में राजनीतिक जमावड़ा देखा जा रहा है. इस्लामाबाद में इमरान ख़ान एक रैली का आयोजन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर विपक्षी ख़ेमा भी इस्लामाबाद में ही एक रैली का आयोजन कर रहा है.

विपक्षी मोर्चे में शामिल JUIF के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में इस्लामाबाद पहुँच रहे हैं. इमरान ख़ान की पार्टी PTI ने पूरे देश से लोगों को इस रैली में शामिल होने के लिए बुलाया है. वहीं विपक्षी ख़ेमा भी अपने समर्थकों को देशभर से बुला रहा है. PTI के पॉवर शो और विपक्ष के मँहगाई भगाओ मार्च की तारीख़ यूँ तो अलग अलग है लेकिन अंतर महज़ एक दिन का है. 27 मार्च को इमरान की रैली है तो 28 मार्च को PML-N का लॉन्ग मार्च है. PML-N के कार्यकर्ता इस्लामाबाद पहुँच रहे हैं वहीं PTI के कार्यकर्ता पहले ही इस्लामाबाद में हैं, ऐसे में ऐसा संभव है कि कार्यकर्ताओं के बीच झगड़ा हो जाए.

इस बीच ऐसी भी ख़बरें हैं कि इमरान ख़ान को इस बात का आभास हो गया है कि उनकी सरकार अविश्वास प्रस्ताव में हार जाएगी. इसलिए वो अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले इस्तीफ़ा दे सकते हैं. इस्तीफ़ा देने से उन्हें चुनाव में फ़ायदा हो सकता है. ख़बर है कि तहरीक ए इंसाफ़ के कई सहयोगी दल प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की कार्यशैली से नाराज़ हैं और अब विपक्षी ख़ेमे में जा बैठे हैं.

इमरान ख़ान की सरकार को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना है ऐसे में अगर उनके सहयोगी उनसे नाराज़ होते हैं तो वो बहुमत से पीछे रह जाएँगे और सरकार गिर जाएगी. इस बीच इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक ए इन्साफ़ को सहयोगी PML-Q से लगा है, PML-Q के नेता परवेज़ इलाही ने साफ़ कह दिया है कि वो और दूसरे दल अब विपक्ष के साथ हैं. इस बयान के बाद इमरान सरकार की मुश्किल बढ़ गई है.

इमरान सरकार में शामिल अहम् सहयोगी पार्टी PML-Q के नेता और पाकिस्तानी पंजाब प्रांत की विधानसभा में स्पीकर परवेज़ इलाही ने कहा है कि सत्‍तारूढ़ गठबंधन में शामिल पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ़ के सभी सहयोगी दल 100 परसेंट विपक्ष की ओर झुके हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया की ख़बर के मुताबिक़ आसिफ़ अली ज़रदारी की पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और नवाज़ शरीफ़ की PML-N ने इलाही को आश्वासन दिया है कि अगर उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया तो उन्हें पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.

पाकिस्तानी पंजाब की 371 सीटों वाली असेम्बली में PML-Q की महज़ 10 सीटें हैं जबकि PML-N की 165 और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सात सीटें हैं. पंजाब में इमरान ख़ान की पार्टी के 184 विधायक हैं. बहुमत के लिए ज़रूरी 186 सीटें बिना PML-Q के पूरी नहीं हो सकतीं, अब तक PML-Q तहरीक ए इन्साफ़ के साथ गठबंधन में रही है. कुल मिलाकर इस समय पाकिस्तान की सियासत पंजाब प्रांत की ज़मीन पर खेली जा रही है.

इस समय पाकिस्तान तहरीक ए इन्साफ़ के नेता उस्मान बुज़दर पंजाब के मुख्यमंत्री हैं जबकि इलाही ख़ुद स्पीकर हैं. परवेज़ इलाही को विपक्ष से मिल रहे आश्वासन पर तहरीक ए इंसाफ़ भी इशारों में उन्हें मुख्यमंत्री की पोस्ट ऑफर कर रही है लेकिन अब इलाही विपक्ष के साथ ही खड़े दिख रहे हैं. वो कहते हैं कि मेरा मानना है कि समर्थन का आश्‍वासन देने के लिए प्रति‍निध‍िमंडल को भेजने का समय खत्‍म हो गया है। क्‍या उन्‍होंने ऐसा पहले किया, इससे बचा जा सकता था।

पाकिस्तान की केंद्र सरकार की बात करें तो सरकार पूरी तरह से सहयोगियों पर टिकी है. पाकिस्तान के लोअर हाउस नेशनल असेम्बली में कुल 342 सीटें हैं.बहुमत के लिए 172 सीटों का होना ज़रूरी है. इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इन्साफ़ के सांसदों की संख्या 155 है जबकि उसे MQM-P के सात, PML-Q के पाँच, BAP के पाँच, GDA के तीन और AML का एक सांसद का समर्थन प्राप्त है. तीन अन्य सांसदों का भी समर्थन सरकार को प्राप्त है.

विपक्षी ख़ेमे की बात करें तो PML-N के 84, PPP के 56, MMA के 15, BNP-M के 4, ANP का एक सांसद है. विपक्ष को 2 निर्दलीय सांसदों का भी समर्थन प्राप्त है. विपक्षी ख़ेमे की कुल संख्या 162 है. परन्तु अगर PML-Q, BAP और GDA सत्ता पक्ष छोड़कर विपक्षी ख़ेमे में खड़ा हो जाता है तो ये संख्या अधिक हो जाएगी और इमरान सरकार अल्पमत में चली जाएगी. 28 मार्च को असेम्बली का सेशन शुरू होगा और उसके बाद ही अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी.

इमरान को अपनी सरकार बचाने के लिए 172 सांसदों का समर्थन चाहिए लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो फ़िलहाल इमरान के पक्ष में सांसदों की संख्या 162 के क़रीब ही रह गई है. पाकिस्तान की सियासत में शक्तिशाली मानी जाने वाली पाकिस्तानी सेना इस पूरे राजनीतिक संकट से ख़ुद को दूर रखने की बात कही है और ख़बर है कि सेना इस पूरे संकट पर न्यूट्रल रहेगी.