जेल में आज़म ख़ान, अब्दुल्ला आज़म के हाथों में होगी बागडोर? रामपुर ज़िले में सपा ने झों’की ताक़त..

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब हर पार्टी अपने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर रही है. हर पार्टी की कोशिश यही है कि ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जीतकर प्रदेश की सत्ता हासिल करे. उत्तर प्रदेश चुनाव को ध्यान से देखें तो यहाँ हर सीट की अपनी एहमीयत है. यूँ तो पूरे प्रदेश में चुनावी माहौल तेज़ है लेकिन अभी माहौल वहाँ ज़्यादा ज़ोर पकड़े हुए हैं जहाँ पर पहले और दूसरे चरण में मतदान है.

इसी बात के मद्देनज़र रामपुर ज़िले में भी चुनावी सरगर्मियां तेज़ हैं. रामपुर समाजवादी पार्टी के लिए ख़ास माना जाता है. इसका कारण है कि यहाँ से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान आते हैं. रामपुर ज़िले में कुल पाँच विधानसभा सीटें आती हैं- स्वार, चमरब्बा, बिलासपुर, रामपुर और मिलक.

2017 के विधानसभा चुनाव में यूँ तो सपा की प्रदेश में करारी हार हुई थी लेकिन यहाँ की पाँच विधानसभा सीटों में से सपा ने 3 सीटें जीती थीं जबकि दो सीटें भाजपा के खाते में गई थीं. रामपुर को सपा का गढ़ माना जाता है. समाजवादी पार्टी ने इस बार यहाँ अपनी पूरी ताक़त लगाने का फ़ैसला किया है. यही वजह है कि आज़म ख़ान को भी पार्टी चुनाव लड़ाएगी. चलिए बात करते हैं उन उम्मीदवारों की जो सपा से खड़े हो सकते हैं.

आज़म खान: आज़म फ़िलहाल लोकसभा सांसद हैं लेकिन सपा चाहती है कि इस बार चुनाव में कोई कसर न रहे इसलिए आज़म को रामपुर शहर सीट से उम्मीदवार बनाया जाएगा. आज़म रामपुर से 9 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं, वह कई बार मंत्री रहे हैं. आज़म को मुलायम के सबसे पुराने साथियों में गिना जाता है. अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से आज़म फ़िलहाल जेल में बंद हैं लेकिन सपा की लीगल टीम उनकी ज़मानत को लेकर पुरज़ोर कोशिश में लगी हुई है.

अब्दुल्ला आज़म: अब्दुल्ला आज़म ख़ान के बेटे हैं और सन 2017 में स्वार विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. हालाँकि कम उम्र को लेकर उनके विरोधी नवाब क़ाज़िम अली ख़ान ने उनके ख़िलाफ़ याचिका डाल दी और हाई कोर्ट ने अब्दुल्ला आज़म का निर्वाचन रद्द कर दिया. अब्दुल्ला पर दर्ज मुक़दमों की वजह से वो लम्बे समय तक जेल में भी रहे. हालाँकि अब्दुल्ला का दावा है कि उन पर जो भी मुक़दमे लगे हैं सभी राजनीति से प्रेरित हैं. अभी कुछ ही दिन पहले अब्दुल्ला ज़मानत पर रिहा हुए हैं. एक बार फिर वह स्वार से चुनाव लड़ेंगे.

विजय सिंह: आज़म ख़ान के बेहद क़रीबी माने जाने वाले विजय सिंह को सपा ने टिकट दे दिया है. 2012 में वह सपा के टिकट पर चुनाव जीते थे लेकिन 2017 में उन्हें भाजपा की राजबाला ने परास्त कर दिया था. मिलक सीट से सपा उन्हें उम्मीदवार बना रही है.

अमरजीत सिंह: बिलासपुर विधानसभा सीट से सपा ने इस बार अमरजीत सिंह को प्रत्याशी बनाया है. अमरजीत फ़िलहाल ज़िला पंचायत सदस्य हैं. वो पिछले तीन बार से लगातार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जीत दर्ज कराते हुए जिला पंचायत सदस्य बने.

नसीर अहमद ख़ान: सपा ने चमरौआ विधानसभा सीट से नसीर को टिकट दिया है. नसीर आज़म के बेहद ख़ास माने जाते हैं. 2012 में उन्हें सपा ने टिकट दिया था लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सके थे, 2017 में एक बार सपा ने उन्हें टिकट दिया लेकिन उन्हें फिर हार ही मिली. सपा इस बार उन्हें चमरौआ से चुनाव लड़ा रही है.

ऐसा माना जा रहा है कि सपा यहाँ की 5 में से 3 सीटों पर बेहद मज़बूत है. स्वार, चमरौआ और शहर की सीटें ऐसी हैं जहाँ सपा को हराना बहुत मुश्किल माना जाता है. मिलक में सपा और भाजपा में मुक़ाबला देखने को मिल सकता है जबकि बिलासपुर में भाजपा राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलक को चुनावी मैदान में उतार रही है. यहाँ सपा, भाजपा और कांग्रेस में त्रिकोणीय मुक़ाबला हो सकता है.

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