समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान को लेकर बड़ी ख़बर आ रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों के शपथ ग्रहण का सिलसिला चल रहा है। ऐसे में आज़म ख़ान को भी विधायक पद की शपथ लेने के लिए विधानसभा जाना है। परंतु आज़म अभी जेल में बंद हैं।

ख़बर है कि आज़म को लेकर जेल एडमिनिस्ट्रेशन ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उन्हें शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए ज़मानत दी जाए। अदालत ने एडमिनिस्ट्रेशन के आग्रह को नहीं माना और उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया। ख़बर ये भी है कि ख़ुद आज़म आज शपथ ग्रहण में शामिल होना नहीं चाहते थे।

आज़म ने इच्छा ज़ाहिर की थी कि उन्हें आज शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए ज़मानत न दी जाए। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उन्हें शपथ ग्रहण में शामिल होने को लेकर ज़मानत मिल जाएगी। आज़म सपा के वरिष्ठ नेता हैं और रामपुर सीट से विधायक चुन कर आये हैं।

आज़म रामपुर सीट से लोकसभा सांसद थे लेकिन विधायक बन जाने के बाद उन्होंने लोकसभा से इस्तीफ़ा दिया। उनके अलावा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी लोकसभा की सदस्यता छोड़ी है। सपा का सोचना है कि यदि पार्टी मज़बूत करनी है और भाजपा से मुक़ाबला करना है तो सपा के बड़े नेताओं को लखनऊ में ही डेरा डालना होगा।

आज़म ख़ान जिस लोकसभा सीट से सांसद थे वो आज़म का मज़बूत गढ़ मानी जाती है। सपा यहाँ से आज़म की पत्नी ताज़ीन फ़ातिमा को चुनाव लड़ा सकती है। वहीं आज़मगढ़ लोकसभा सीट अखिलेश यादव के इस्तीफ़ा देने की वजह से ख़ाली हुई है। आज़मगढ़ सीट पर डिम्पल यादव लोकसभा उपचुनाव में प्रत्याशी हो सकती हैं।

सपा की ओर से कोशिश है कि 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जाए। ऐसी भी ख़बरें हैं कि सपा उम्मीदवारों की एक लिस्ट बना रही है जिससे कि विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे की ग़लती लोकसभा चुनाव में न हो।

पार्टी को ये भी उम्मीद है कि जल्द ही सपा नेता आज़म ख़ान जेल से बाहर होंगे। आज़म के जेल से बाहर आने से सपा को मनोवैज्ञानिक फ़ायदा होने की उम्मीद है। आज़म भ्रष्टाचार के कई मामलों में जेल में बंद हैं। आज़म और सपा का दावा है कि ये सभी आरोप आज़म और उनके परिवार को परेशान करने के लिए लगाए गए हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है।