आज़म ख़ान तुरंत चले गए तो 20 मिनट तक अब्दुल्ला आज़म के साथ बैठे रहे अखिलेश

May 24, 2022 by No Comments

उत्तर प्रदेश की सियासत पिछले कुछ समय से समाजवादी पार्टी के भीतर चल रही गहमागहमी के इर्द गिर्द घूम रही है। असल में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव में सालों से नाराज़गी चल रही है वहीं शिवपाल पिछले कुछ महीनों में सपा में अपनी बेहतर स्थिति करने की कोशिश करते दिखे। शिवपाल चाहते हैं कि अखिलेश उन्हें और उनके बेटे को सम्मानित जगह दें।

शिवपाल चाहते हैं कि सपा के संगठन में काम करने का उन्हें मौक़ा दिया जाए। एक समय शिवपाल सपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे। ये तब की बात है जब मुलायम सिंह यादव पारी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।

शिवपाल और अखिलेश में दूरियाँ बढ़ीं और आख़िर शिवपाल को सपा से बाहर कर दिया गया, ख़ुद अखिलेश यादव सपा के अध्यक्ष बन गए। इसके बाद मुलायम ने अखिलेश और शिवपाल में सुलह कराने की बहुत कोशिश की। उसी का नतीजा है कि शिवपाल की पार्टी प्रसपा ने सपा से गठबंधन किया।

2022 विधानसभा चुनाव के बाद ऐसी उम्मीद थी कि अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल को बड़ा पद देंगे लेकिन अखिलेश ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद शिवपाल की नाराज़गी साफ़ झलकने लगी। अखिलेश ने शिवपाल को सपा विधायकों की मीटिंग में भी नहीं बुलाया जबकि शिवपाल सपा के ही विधायक हैं। अखिलेश और शिवपाल दोनों ने इशारों में एक दूसरे पर हमला बोला।

शिवपाल ने इसके बाद वरिष्ठ सपा नेता आज़म ख़ान का मुद्दा उठाया।आज़म लंबे समय से जेल में बंद थे, इसको लेकर शिवपाल ने कहा कि अखिलेश यादव और सपा ने आज़म के लिए कोई विशेष क़दम नहीं उठाया। शिवपाल इसके बाद आज़म से जेल में भी मिले।

इसके पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ये बयान दे चुके थे कि ख़ुद अखिलेश यादव नहीं चाहते कि आज़म बाहर आएं। असल में यूँ तो आज़म ख़ान पर 88 मुक़दमे दर्ज किए गए लेकिन कोई भी ऐसा मुक़दमा नहीं था जो ग़ैर-ज़मानती हो या फिर संगीन माना जाए। हालाँकि अलग-अलग मुक़दमों में ज़मानत की प्रक्रिया में समय लगने की वजह से आज़म को 26 महीने जेल में ही रहना पड़ा।

आज़म ख़ान को सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम ज़मानत दे दी है जिसके बाद वो सीतापुर जेल से बाहर आ गए हैं। आज़म ने इसके बाद जो बयान दिए उसमें वो सपा के ख़िलाफ़ जाने की बात से इनकार करते दिख रहे हैं लेकिन कहीं न कहीं नाराज़गी भी नज़र आ रही है।

अब ख़बर है कि आज़म ख़ान, शिवपाल यादव और ओम प्रकाश राजभर एक साथ खड़े दिख रहे हैं। विधानसभा सत्र के पहले दिन आज़म ख़ान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म ख़ान ने विधानसभा सदस्य के पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद आज़म घर चले गए जबकि अब्दुल्ला सदन में ही रुके। सदन की कार्यवाई स्थगित होने के बाद अब्दुल्ला आज़म को अखिलेश यादव ने अपने पास बुलाया। दोनों में बीस मिनट तक बातचीत हुई। इस बातचीत के बाद दोनों के चेहरे पर संतुष्टि नज़र आई।

कुल मिलाकर ये बात तो लग रही है कि आज़म ख़ान सपा छोड़कर नहीं जाने वाले लेकिन शिवपाल के साथ मिलकर अखिलेश पर दबाव बना सकते हैं। दोनों नेता पुराने साथी माने जाते हैं और राजनीति के हर पेंच से अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं।

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