पोस्टल बैलेट में बलरामपुर की सभी सीटों पर सपा को मिले सबसे ज़्यादा वोट,तुलसीपुर में तो…

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। एक बार फिर बहुमत हासिल करके भाजपा गठबंधन सरकार बनाने जा रहा है जबकि सपा गठबंधन विपक्ष की भूमिका निभाने को तैयार है।बलरामपुर ज़िले की बात अगर करें तो यहाँ पर चार विधानसभा सीटें हैं जिनमें से तीन भाजपा ने जीती हैं और एक सीट सपा के खाते में गई है।

ज़िले की गैंसड़ी सीट सपा ने जीती है जबकि बलरामपुर, तुलसीपुर और उतरौला सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। इन सभी सीटों के आँकड़े समझने की कोशिश करते हैं।

हम ये भी देखेंगे कि किसको कितने EVM वोट मिले हैं और क्या हाल है पोस्टल बैलेट से पड़े वोटों का।सबसे पहले बात करते हैं बलरामपुर सीट की। यहाँ से भाजपा के पलटूराम और सपा के जगराम पासवान चुनावी मैदान में थे।

भाजपा प्रत्याशी पलटूराम ने यहाँ जगराम पासवान को सीधे मुक़ाबले में हरा दिया। पलटूराम को 101146 वोट मिले जबकि पासवान को 90175 वोट ही मिल सके।

अब इस सीट पर पोस्टल बैलेट में इन दो प्रत्याशियों का क्या मुक़ाबला रहा देखते हैं- भाजपा के पलटूराम को 250 पोस्टल बैलेट वोट मिले जबकि सपा के जगराम पासवान को 502 वोट मिले।

ज़ाहिर है कि जगराम पासवान पोस्टल बैलेट में दुगने से आगे थे। हालाँकि EVM वोट पलटूराम को 100896 मिले जबकि पासवान को 89673 वोट मिले।

बात अगर तुलसीपुर की करें तो तुलसीपुर सीट पर भाजपा के कैलाश नाथ शुक्ला, सपा के अब्दुल मशहूद ख़ान और निर्दलीय ज़ेबा रिज़वान ही टक्कर में रहे।

बसपा ने यहाँ से भुवन प्रताप और कांग्रेस ने दीपंकर सिंह को टिकट दिया था।भाजपा के कैलाश नाथ शुक्ला यहाँ से चुनाव जीते, उन्हें 87032 वोट मिले। दूसरे स्थान पर निर्दलीय ज़ेबा रिज़वान रहीं, उन्हें 51251 वोट मिले।

पोस्टल बैलेट में पड़े वोटों को ध्यान में लें तो भाजपा के कैलाश नाथ को 130 वोट मिले, निर्दलीय ज़ेबा रिज़वान को 40 और सपा के अब्दुल मशहूद को 350 वोट मिले। सपा ने यहाँ भी पोस्टल बैलेट में दुगने से अधिक मार्जिन से बाज़ी मारी।

सपा यहाँ तीसरे स्थान पर रही लेकिन पोस्टल बैलेट में वो सबसे आगे थी। कैलाश नाथ को EVM से 86902 वोट मिले, ज़ेबा को 51211 और मशहूद को 42465 वोट ही मिले। ज़ाहिर है कि पोस्टल बैलेट और EVM के समीकरण यहाँ भी पूरी तरह से अलग दिखे।

बात करते हैं उतरौला विधानसभा सीट की। उतरौला से सपा ने हसीब ख़ान, भाजपा ने राम प्रताप वर्मा, कांग्रेसने धीरेंद्र प्रताप सिंह और बसपा ने राम प्रताप को टिकट दिया था।

AIMIM ने भी यहाँ अच्छी लड़ाई की कोशिश की थी और अब्दुल मन्नान को टिकट दिया था। यहाँ भाजपा के राम प्रताप वर्मा ने 87162 वोट पाकर जीत दर्ज की, दूसरे स्थान पर हसीब ख़ान रहे, उन्हें 65393 वोट मिले।

कांग्रेस प्रत्याशी को यहाँ 12944 वोट मिले जबकि AIMIM के अब्दुल मन्नान को 12303 वोट ही मिल सके। बसपा के राम प्रताप को 9669 वोट मिले

इसी सीट पर पोस्टल बैलेट्स की बात करें तो सपा के हसीब ख़ान सबसे आगे रहे। हसीब को 400 पोस्टल बैलेट वोट मिले, भाजपा को महज 135 और बसपा को 46 वोट ही मिले।

कांग्रेस के धीरेंद्र प्रताप को 37 और AIMIM को 16 पोस्टल बैलेट के वोट मिले। यानी कि इस सीट पर भी सपा ही बड़े मार्जिन से पोस्टल बैलेट जीती परंतु EVM वोट में वो बहुत पीछे रही।

भाजपा को EVM में 87027 वोट मिला और सपा को 64993 वोट मिला।ये तीनों वो सीटें थीं जिनमें सपा की हार हुई और भाजपा की जीत हुई, अब बात उस सीट की करेंगे जहाँ से समाजवादी पार्टी जीती और भाजपा हार गई।

गैंसड़ी सीट पर सपा ने डॉ शिव प्रताप यादव को टिकट दिया था, भाजपा ने शैलेश कुमार सिंह उर्फ़ “शैलू” को टिकट दिया और बसपा ने अलाउद्दीन को चुनावी मैदान में उतारा। सपा के डॉ एसपी यादव को 74931 वोट मिले वहीं भाजपा के शैलू को 69508 वोट मिले।

सपा ने यहाँ से क़रीबी अंतर से जीत दर्ज की। बसपा के अलाउद्दीन ने 31914 वोट हासिल किए।पोस्टल वोटों की बात करें तो यहाँ सपा को 414 पोस्टल वोट मिले जबकि दूसरे स्थान पर भाजपा नहीं बल्कि बसपा प्रत्याशी रहे।

बसपा प्रत्याशी को यहाँ 72 पोस्टल वोट मिले जबकि भाजपा को महज़ 66 पोस्टल वोट हासिल हुई। कांग्रेस को 7 और AIMIM को 5 पोस्टल वोट मिले जबकि एक पोस्टल वोट निर्दलीय प्रत्याशी आएशा को भी मिला।

EVM वोटों में भी यहाँ सपा आगे रही, सपा के डॉ एसपी यादव को 74931 EVM वोट मिले और भाजपा के शैलू को 69442 वोट मिले जबकि अलाउद्दीन को 31842 वोट मिले।

इससे साफ़ है कि पोस्टल बैलेट में समाजवादी पार्टी गैन्सड़ी सीट पर बड़े अंतर से जीती लेकिन आख़िर नतीजे में उसे भाजपा को हराने के लिए ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी.

बलरामपुर ज़िले की सभी चार सीटों पर समाजवादी पार्टी पोस्टल बैलेट में अधिक वोट पायी और सबसे आगे रही. हालाँकि EVM वोटों के मिलान के बाद सपा महज़ एक सीट जीत सकी और भाजपा के खाते में तीन सीटें चली गईं.

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