देश भर में कोरो’ना वाय’रस के माम’ले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। भारत में अबतक वाय’रस से संक्र’मित 63 लाख से भी ज़्यादा के’स आ चुके हैं। लगभग रोजाना ही इस जान’लेवा बीमा’री से जुड़ी चौं’काने वाली बातें साम’ने आती हैं। इस बीच अब खबर है कि कोरो’ना वाय’रस में बच्चे एक्टि’व स्प्रेडर हैं यानी बच्चों की वजह से संक्र’मण तेज़ी से बढ़ रहा है। कोरो’ना वाय’रस पर की गई एक स्टडी में पाया गया कि संक्र’मितों का दसवां भाग सुपर स्प्रेडर यानी संक्र’मण को अधिक फैलाने वाले हैं।

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के साइंस जर्नल में Sars-cov-2 के ट्रांस’मिशन पैटर्न पर यह कॉन्टै’क्ट ट्रेसिंग स्टडी की गई है। इसमें 575000 लोगों के संक्र’मण पैटर्न पर स्टडी की गई है, जिसमें लगभग 85 हज़ार लोग संक्र’मित पाए गए। वॉशिंगटन के सेंटर फॉर डिजीज डायनामिक्स, इकोनोमिक्स एंड पॉलिसीज के डायरेक्टर रमनान लक्ष्मीनारायणन की अगुआई में की गई इस स्टडी के दौरान यह भी पता चला कि कोरो’ना वाय’रस में बच्चे एक्टि’व स्प्रेडर हैं। यही नहीं बल्कि 40 से लेकर 69 साल के लोगों में डै’थ रेट यानी मृ’त्यु दर ज्यादा है।
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स्टडी में यह भी बताया गया है कि 5 से लेकर 17 साल तक के बच्चों में संक्र’मण पाया गया है और 18 से 39 साल की लोगों में यह रेट 12.3 प्रतिशत है। वहीं इस स्टडी से यह बात भी सामने आई कि कोरो’ना वाय’रस से म’हिलाओं के मुकाबले आदमियों की मौ’त का अनुमान ज़्यादा है। इनमें में उन लोगों की मृ’त्यु ज़्यादा हुईं हैं जो पहले से किसी बीमा’री से पी’ड़ित थे। इसके साथ ही अध्ययन में यह बात भी साम’ने आई कि संक्र’मितों के संप’र्क में आने वाले लोगों में काफी बदलाव देखा है, लेकिन इन सबमें वह लोग ज़्यादा थे जिनसे संक्र’मण नहीं फैला।

रिसर्च का ने’तृत्व करने वाले रमनान लक्ष्मीनारायणन ने इस संबं’ध में बताया, “अक्सर सुपर स्प्रेडर को एक घ’टना के लिए गलत भी मान लेते हैं, लेकिन हमारी स्टडी में संक्र’मित व्यक्तियों का दसवां भाग अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा संक्र’मण फैलाता पाया गया है। ये भारत ही नहीं, अन्य सभी देशों में भी यह एक बड़ी भूमिका निभाता है।” साथ ही यह भी बताया कि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में 60 प्रतिशत के’स इन्हीं सुपर स्प्रेडर के कार’ण बढ़े हैं।

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