आजकल के दौर में पार्टियाँ चुनाव में काफ़ी ख़र्च करने लगी हैं. पिछले कुछ चुनाव में जिस तरह से पैसा ख़र्च हुआ उससे माना जा सकता है कि पैसे का दखल चुनाव में बढ़ गया है. बात करें हालिया बिहार विधानसभा चुनाव की. पिछले साल सितम्बर में बिहार विधानसभा चुनाव हुए थे. बिहार चुनाव में खर्चों की बात करें तो भाजपा ने सबसे अधिक 75 करोड़ रुपए ख़र्च किया थे.

इसका करीब एक तिहाई हिस्सा विमानन कंपनियों के खाते में गया। यह शुद्ध रकम 24 करोड़ रुपये है। भाजपा के पास प्रचारकों की फौज थी। अधिक से अधिक सभाओं में नेता समय पर पहुंच सकें, इसके लिए हेलीकाप्टर का इंतजाम किया गया था। वह 74 सीटों पर जीती। बिहार में चुनावी उपलब्धियों के लिहाज से भी उसने रिकार्ड ही बनाया।
Narendra Modi- Amit Shah
दूसरी ओर राजद की बात करें तो हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल उन्होंने भी काफ़ी किया. लिहाजा इस मद में उसका खर्च भाजपा की तुलना में काफी कम हुआ। फिर भी राजद के 75 उम्मीदवार चुनाव जीत कर विधायक बने। विजेताओं की यह संख्या भाजपा से एक अधिक है। हेलीकाप्टर मद में उसका कुल खर्च दो करोड़ रुपये है। राजद ने चुनाव आयोग को करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब दिया।

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के करीब 17 करोड़ रुपये खर्च हुए। भाजपा की तरह कांग्रेस भी अपने उम्मीदवारों को चुनाव का खर्च देती है। उसके ढाई करोड़ रुपये हेलीकाप्टर पर खर्च किए, जिसे अखिल भारतीय कांग्रेस द्वारा वहन किया गया। तीन वाम दलों की जीत 16 सीटों पर हुई। भाकपा माले के 12, भाकपा और माकपा के दो-दो उम्मीदवार विधायक बने।

तीनों वाम दलों के हिसाब-किताब वाले खाते में हेलीकाप्टर-हवाई जहाज के नाम पर शून्य दर्ज है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एनडीए के दूसरे दलों के हेलीकाप्टर की सवारी तो की, मगर अपनी जेब से किसी हेलीकाप्टर कंपनी को एक पाई नहीं दिया। मोर्चा के उम्मीदवार सात सीटों पर खड़े थे। चार पर जीत हुई। कुल 52 लाख रुपये खर्च हुए।

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