पटना: बिहार में एक ऐसी सरकार बनी है जिसके समीकरण पूरे देश से अलग हैं. यहाँ पर मुख्यमंत्री तो जदयू के नीतीश कुमार हैं लेकिन उनकी सीटें उनके सहयोगी दल भाजपा से काफ़ी कम हैं. कहा जाता है कि इस बात को भाजपा कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे हैं और लगातार नीतीश कुमार से समर्थन वापिस लेने की माँग भाजपा नेतृत्व से करते रहते हैं.

अब मुश्किल ये है कि अगर भाजपा नेतृत्व उनकी बात सुन ले तो नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद तो चला जाएगा लेकिन साथ ही बिहार में NDA की सरकार भी चली जाएगी. अगर नीतीश कुमार राजद के पाले में चले गए तो फिर वो मुख्यमंत्री बन जाएँगे बस भाजपा की सरकार चली जाएगी. भाजपा के बिहार नेता चाहते हैं कि पार्टी जदयू के विधायकों को तोड़ ले और साथ ही कुछ कांग्रेस के विधायकों को तोड़ ले.

परन्तु ये बातें कहना आसान हैं होना मुश्किल. इसलिए भाजपा इस तरह की कोई हरकत करना नहीं चाहती. हाल ही में हुए बिहार विधान परिषद चुनाव में जदयू तीसरे नम्बर पर चली गई. बिहार में विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव हुआ जिसमें से भाजपा सात सीटों के साथ सबसे आगे रही लेकिन राजद ने दूसरे नम्बर पर रहकर जदयू को चौंका दिया.

इस चुनाव में NDA को कुल 13 सीटें मिलीं जिसमें से सात भाजपा, 5 जदयू और RLJP को एक सीट मिली. दूसरी ओर विपक्ष के खाते में राजद ने 6 सीटें जीतीं, एक कांग्रेस और 4 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते. अब जदयू कह रही है कि भाजपा के लोकल नेताओं ने उसके साथ गेम कर दिया. राजद दूसरे नम्बर पर रहकर भी ख़ुश है क्यूँकि राजद मानती है कि सरकार में न रहते हुए इतनी सीटें ही जीतना बड़ी बात है.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के अनुसार हर दिन भाजपा के नेताओं के बयानबाज़ी के कारण एक भ्रम की स्थिति बन गयी है कि बिहार एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. उनके अनुसार गठबंधन धर्म का पालन सभी दलों को करना चाहिए लेकिन हर दिन भाजपा के कुछ नेताओं के बयान से एक ग़लत संदेश खुद एनडीए के वोटर के बीच गया है. यादव ने कहा कि अगर एनडीए नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में जाते तो परिणाम और बेहतर हो सकता था.

निश्चित रूप से विजेंद्र यादव के बयान से बिहार एनडीए ख़ासकर भाजपा और जनता दल यूनाइटेड में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा, उसकी पुष्टि होती है लेकिन जनता दल यूनाइटेड को ख़ासकर इस बात का मलाल है कि पार्टी उम्मीदवारों को वो चाहे पटना सीट हो या मुंगेर या पश्चिम चंपारण सब जगह भीतरघात का सामना करना पड़ा.

हालाँकि, यादव के इस बयान पर भाजपा की कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है लेकिन भाजपा के नेता कहते हैं कि भाजपा जिन सीटों पर हारी, वहाँ जनता दल यूनाइटेड के नेता उनके प्रत्याशी के प्रति बहुत उत्साह से काम करते कहीं नहीं दिखे.