लोकसभा चुनाव के बाद इन राज्यों में हारी भाजपा, यहाँ तो जीत के बावजूद भी नहीं बनी सरकार…

June 15, 2021 by No Comments

साल 2000 14 मई भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल कर केंद्र की सत्ता में एंट्री ली थी। जिसके बाद कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। लोकसभा चुनाव 2014 के बाद कमजोर होती कॉन्ग्रेस के कई नेता पार्टी को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी जीत दर्ज की एक बार फिर से केंद्र की सत्ता में भाजपा की सरकार ने एंट्री ली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही पीएम कुर्सी पर काबिज रहे। हालांकि साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। उनमें से भारतीय जनता पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। आपको बता दें कि झारखंड में एनडीए गठबंधन को साल 2019 के लोकसभा चुनावों में सिर्फ 12 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी यहां 81 विधानसभा सीटें हैं जिसमें से बहुमत का आंकड़ा 41 सीटों का है साल 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा कांग्रेस और राजद का गठबंधन था।

जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा को 30 सीटें हासिल हुई कांग्रेस को 16 और राजद को सिर्फ एक वहीं भाजपा को 25 सीटें मिली थी। अगर झारखंड के 2019 विधानसभा चुनाव की तुलना साल 2014 में हुए विधानसभा चुनाव से की जाए तो आप पाएंगे कि हम भाजपा के प्रदर्शन में पहले के मुकाबले साल 2019 में भारी कमी देखने को मिली जहां साल 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 37 सीटें हासिल की थी और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी वही एनडीए गठबंधन 42 सीटों पर जीत हासिल कर चुका था और इसके बाद रघुवर दास को मुख्यमंत्री बनाया गया।

2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें कम होकर 25 पर आ गई। बीजेपी झारखंड चुनाव हार गई। इसका कारण ये भी है कि बीजेपी के नेता और 2014 में बने झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास पर जनता आ’रोप लगा रही थी। उनपर आरोप लगने लगे थे कि वो जनता की स’मस्याओं को सुनन्ने के लिए उनके बीच नही पहुंचते।

दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमन्त सोरेन की बढ़ती हुई लोकप्रियता ने भी बीजेपी को नु’कसान पहुंचाया। इसी वजह से बीजेपी ने झारखंड राज्य को गवां दिया। जहां उसकी पहले सरकार थी। अब अगला राज्य महाराष्ट्र है जहां पहले एनडीए गठबंधन की सरकार थी लेकिन बीजेपी ने 2019 में उसे भी खो दिया।

2014 में महाराष्ट्र में प्रमुख दावेदार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी की एनडीए थे। यूपीए गठबंधन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल थी जबकि एनडीए गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना शामिल थी। 2014 में बीजेपी 122 सीटों पर सि’मट गई थी। और शिवसेना ने चुनाव में 63 सीटें जीतीं थीं। जिसके बाद शिवसेना दूसरे नंबर पर पहुंच गई थी। पिछले 15 साल से राज्य में सत्ता चलाने वाली कांग्रेस को 42 सीटें और एनसीपी को 41 सीटें मिली थी। 2014 में बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने।

2019 लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से 41 पर जीत मिली थी। बीजेपी ने 23 और उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने 18 सीटों पर जीत हासिल की थी। फरवरी 2019 में, भाजपा और शिवसेना ने फिर से भाजपा के लिए 25 और शिवसेना के लिए 23 सीटों के साथ गठबंधन की घो’षणा की।

चुनावी नतीजे आने के बाद बीजेपी को -105, कांग्रेस को – 44, और शिवसेना को- 56 सीटें मिली। महाराष्ट्र में 2014 के चुनाव में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन ने सरकार बनाई थी और कांग्रेस , एनसीपी को वि’पक्ष में रहने पड़ा था। लेकिन 2019 में यह तस्वीर बदल गई। बीजेपी ने एनसीपी के बड़े नेता अजीत पवार को अपनी तरफ कर लिया और रातों रात बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

हालाँकि बहुमत साबित न कर पाने की स्थिति में देवेंद्र फडणवीस ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही इ’स्तीफा दे दिया था। इस बार भी भाजपा और शिवसेना ने साथ में चुनाव लड़ा लेकिन चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना और भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर अ’नबन गई और गठबंधन टू’ट गया। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी गठबंधन के तहत सरकार बनाई। सबसे ज़्यादा सीटें हासिल करने के बाद भी बीजेपी राज्य में सरकार नही बना पाई क्योंकि बीजेपी ग’ठबंधन में सफल नही हो पाई थी।

2016 में तमिलनाडु के अंदर अन्नाद्रमुक की प्रमुख जयललिता की सरकार थी। अन्नाद्रमुक को 136 सीटों पर जीत मिली थी। दूसरी तरफ द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को 98 सीटें हासिल हुई थी। कांग्रेस को 8 सीटें ही मिली थी। जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए । 2021 चुनाव में, एआईडीएमके के साथ बीजेपी ने गठबंधन किया। बीजेपी ने दक्षिण भारत में अपने विस्तार के लिए एआईडीएमके को अपना पूरा समर्थन दिया। वहीं कांग्रेस ने चुनावों में डीएमके से गठबंधन किया।

द्रमुक ने 133 सीटे जीती। एनडीए गठबंधन ने 75 सीटे जीती। जिसमें से अन्नाद्रमुक ने 66 पर जीत हासिल की थी। यहां 234 विधानसभा सीटो के लिए वोटिंग हुई जिसमे बहुमत का आंकड़ा 108 सीटों का है। और द्रमुक ने अन्नाद्रमुक को हरा दिया। अन्नाद्रमुक के हा’रने का ये कारण भी है कि अब उनके पास जयललिता जैसा नेता नही है।

दूसरी तरफ काफी समय में सत्ता में रहने की वजह से उसकी लोकप्रियता जनता के बीच कम हो गई। बीजेपी का तमिलनाडु में विस्तार करने का सपना टू’ट गया।करुणानिधि की मौ’त के बाद द्रमुक ने पहली बार चुनाव लड़ा। द्रमुक के नेता एमके स्टालिन ने चुनाव में बहुत मेहनत की थी। उनकी मेहनत रंग लाई और वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। इस प्रकार बीजेपी ने झारखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु राज्य को गवां दिया। बिजेपी इन राज्यों में सरकार नही बना पाई।

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