बेंगलुरु: भारत में शायद ही कोई टीपू सुलतान के नाम को न जानता हो. टीपू ने जिस तरह से अंग्रेज़ों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी वो पूरे भारतीय इतिहास के लिए मिसाल है. टीपू ने एक यो’द्धा का परिचय देते हुए सरेंडर करने के बजाय अंग्रेज़ों से अंतिम समय तक ल’ड़ना ही बेहतर समझा. उनकी जांबाज़ी की तारीफ़ उनके दुश्मन भी करते थे. टीपू के शहीद होने के बाद भी देश ने एक लंबा दौर देखा जिसमें ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी और बाद में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय लोगों का दमन किया.

गांधी जी, भगत सिंह, सुभाष बोस, जैसे महान लोगों ने भारत को ब्रिटिश शासन के चंगुल से आज़ाद कराया. आज़ादी के पहले और आज़ादी के बाद तक कभी किसी ने टीपू सुलतान पर कोई ऊँगली नहीं उठाई लेकिन कर्णाटक की भाजपा सरकार टीपू को हीरो नहीं मानती. कर्णाटक में भाजपा की सरकार टीपू सुलतान जयंती नहीं मनाना चाहती और साथ ही उनके सम्मान में कोई शब्द नहीं लिखे देखना चाहती.

बीएस येदयुरप्पा

कर्णाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदयुरप्पा ने अब इसमें एक और क़दम आगे बढ़ते हुए कहा है कि वो हर वो चीज़ हटाने जा रहे हैं जो टीपू जयंती से जुड़ी हो और टीपू के बारे में जो कुछ भी टेक्स्टबुक्स में है सब हटाया जाएगा. भाजपा जहाँ इसे ज़रूरी मानती है और कहती है कि टीपू ने भले अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ जंग लड़ी और वो लड़ते-लड़ते शहीद हो गए लेकिन उनके समय में हिन्दुओं को मुसलमान भी बनाया गया था. इतिहासकार भाजपा की इस बात में कोई तथ्य न होने की बात कहते हैं. बहुत से जानकार ये कह रहे हैं कि चूँकि भाजपा को अल्पसंख्यक समुदाय के हीरो से भी चिढ है इसलिए उसे टीपू से भी परेशानी है.

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