देश में ज’नता का रू’ख अब साफ़ न’ज़र आने लगा है। झारखंड चु’नाव में काफ़ी ज़ो’र- शो’र से प्र’चार करने के बाद भी भाजपा को ब’ड़ा नुक़’सान हुआ और झारखंड में सर’कार बनाने का अधि’कार उनके हा’थ से निक’ल ही गया। यहाँ कांग्रेस और सम’र्थित द’ल मिलकर सर’कार बनाएँगे ये बात अब एक तरह से सा’बित ही हो चुकी है। भाजपा को यहाँ सिर्फ़ 25 सीटों में जीत मिली जो कि 2014 के लि’हाज़ से 12 सीटों का नु’क़सान है। जबकि कांग्रेस और सहयोगी द’लों को पिछ’ले चु’नाव के मुक़ाबले 22 सीटों की ब’ढ़त मिली और उन्होंने 47 सीटों पर अपना प’रचम लह’राया है।

देखा जाए तो साल 2019 भाजपा के लिए म’हँगा सा’बित हुआ है इस साल में झारखंड भाजपा के हाथ से निकला पाँचवा राज्य है। झारखंड के अला’वा 2018 से अब तक भाजपा के हाथों से जो राज्य निकल गए वो हैं मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र। इन सभी जगहों पर एक समय में भाजपा ने जीत हा’सिल की थी लेकिन इस साल वो पिछड़ रही है। इनमें सबसे ज़्यादा कि’रकिरी हुई महाराष्ट्र में। महाराष्ट्र में भाजपा ने अपनी सहयोगी पार्टी शिवसेना के साथ मिलकर चु’नाव ल’ड़ा था लेकिन नती’जों के बाद आपसी अ’नबन इस तरह ब’ढ़ी कि सिया’सी गह’मागह’मी पूरे देश में क़ि’स्सा बन गयी।

Devendra Fadnavis

यही नहीं इस माम’ले में कई मो’ड़ आए और भाजपा ने ए’ड़ी चो’टी का ज़ो’र लगाकर सर’कार बनाने की ना’काम कोशिशें की। NCP के अजित पवार के साथ मिलकर भाजपा ने रातोंरात सर’कार का ग’ठन भी कर लिया। ये माम’ला सुप्रीम को’र्ट तक जा पहुँचा। आ’ख़िर भाजपा बहुम’त साबित करने तक भी नहीं पहुँच पायी और डेढ़ दिन के मुख्यमंत्री बन देवेंद्र फडनवीस को इ’स्तीफ़ा देना पड़ा। इस माम’ले में भाजपा शिवसेना को धो’केबाज़ कहती नज़र आयी वहीं शिवसेना ने भाजपा पर वा’दा खिला’फ़ी का इ’ल्ज़ाम लगाया। इस बात में किसने किसका भरो’सा तो’ड़ा ये तो इन दोनों पार्टी के लीड’र ही जानते हैं लेकिन ज’नता के सामने ये सच्चाई है कि भाजपा के हाथ से महाराष्ट्र का शा’सन गया।

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