लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया है. भाजपा ने यहाँ बहुमत हासिल किया है तो समाजवादी पार्टी ने भी पिछली बार की तुलना में बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है. जहाँ भाजपा जश्न में डूबी हुई है वहीं कुछ सीटों पर उसके प्रत्याशियों को अप्रत्याशित हार मिली है. इसमें सबसे अहम् सीट तो सिराथू की है. सिराथू से भाजपा के वरिष्ठ नेता केशव प्रसाद मौर्या चुनाव हार गए हैं.

केशव प्रसाद मौर्या के अलावा पार्टी की मृगंका सिंह भी कैराना से चुनाव हार गई हैं. कैराना में हालाँकि सपा के नाहिद हसन के ही जीतने की उम्मीद थी लेकिन भाजपा ने यहाँ सभी बड़े नेताओं को उतार दिया था लेकिन भाजपा चुनाव नहीं जीत सकी. इस सीट के अलावा जिस सीट की सबसे अधिक चर्चा है वो है सरधाना की.

सरधाना से साम्प्रदायिक राजनीति के लिए जाने जाने वाले भाजपा नेता संगीत सोम की हार हुई है. यहाँ से सपा के अतुल प्रधान ने संगीत सोम को पटखनी दी है. अतुल प्रधान को 118573 वोट मिले जबकि संगीत सोम 100373 वोट ही पा सके. अतुल प्रधान की जीत कई मायनों में अहम् है. संगीत सोम को हराकर अतुल प्रधान ने भी अपनी हैसियत बढ़ा ली है वहीं संगीत सोम की हैसियत में गिरावट आनी तय हो गई है.

सपा की इन सीटों पर हुई जीत पार्टी को आने वाले समय में बहुत मज़बूत कर सकता है. वहीं कैराना से नाहिद हसन का जीतना और सरधाना से संगीत सोम का हारना ये साबित करता है कि साम्प्रदायिक राजनीति के दिन अब बहुत नहीं हैं.

शामली की कैराना विधानसभा को भाजपा ने प्रतिष्ठा बनाया हुआ था लेकिन यहाँ उसकी हार हुई है. यहाँ से सपा के नाहिद हसन चुनाव जीते हैं. नाहिद के मुक़ाबले भाजपा की मृगंका सिंह थीं जिन्हें 25 हज़ार से भी अधिक वोटों से हार मिली है. इस सीट पर भाजपा के कई बड़े नेताओं ने प्रचार किया था जबकि नाहिद ख़ुद जेल में हैं. उनकी बहन इकरा हसन ने प्रचार का ज़िम्मा संभाला था

भाजपा की इस प्रचंड लहर में भी भाजपा के कुछ दिग्गज चुनाव में हार गए. सिराथू से केशव प्रसाद मौर्या को हार मिली है. बड़बोले बयानों के लिए जाने जाने वाले केशव प्रसाद मौर्या उत्तर प्रदेश सरकार में उप-मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनकी हार हो गई है.सपा की डॉ पल्लवी पटेल ने केशव प्रसाद मौर्या को सीधे मुक़ाबले में हरा दिया. पल्लवी को 105838 वोट मिले जबकि मौर्या को 98361 वोट ही मिले.