मुंबई: महाराष्ट्र और हरियाणा में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन जिस तरह से दोनों राज्यों में उसका ग्राफ़ लोकसभा चुनाव की तुलना में कम हुआ है वो पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया है. भाजपा की परफॉरमेंस को लेकर भाजपा में ही विवाद शुरू हो गया है. हरियाणा में कांग्रेस का संगठन पूरी तरह से टूट चुका था और अंत समय में भूपिंदर सिंह हुड्डा को ज़िम्मेदारी दी गई थी लेकिन हुड्डा ने कुछ ही दिनों काया पलट कर दी और कांग्रेस को उन्होंने लगभग जिता ही दिया था.

उनके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने अंतिम समय में रैली कर के पार्टी का समां बाँधा. महाराष्ट्र की बात करें तो महाराष्ट्र में भी स्थिति कुछ इसी तरह की थी. बड़े नेता रैली करने से घबरा रहे थे. कांग्रेस में सर-फुटव्वल का दौर सा चल रहा था और ऐसा लग रहा था कि पार्टी की यहाँ काफ़ी बुरी हालत होगी. कांग्रेस के अलावा उसके सहयोगी एनसीपी को तो भाजपा नेताओं ने ख़त्म मान लिया था.

शरद पवार के नेतृत्व में जिस धार दार तरह से कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन ने वापसी की वो भाजपा के लिए चिंता का विषय है. भाजपा-शिवसेना किसी तरह चुनाव जीतने में तो कामयाब रहे लेकिन एनसीपी-कांग्रेस ने कम तैयारी के बाद भी जो प्रदर्शन किया है वो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए चिंता का विषय है.

ये अलग बात है कि भाजपा नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे बड़ी जीत बता रहे हैं लेकिन कहीं न कहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मोदी दोनों को मालूम हो गया है कि पब्लिक का मूड चेंज हो गया है. यही वजह है कि अब पार्टी संगठन में बदलाव कर सकती है. इस तरह की चर्चाएँ शुरू हो गई हैं कि भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की वजह से ये हार हुई है. नड्डा के बारे में भाजपा दफ़्तरों में कई तरह की बातें चल रही हैं. उनकी आलोचना जमकर हो रही है. आने वाले समय में अगर भाजपा उन पर कोई कार्यवाही करे तो ये कोई अचरज की बात न होगी.

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