सरकारी संस्था के हेड ने किया दावा-‘भाजपा को मिलेंगी 140 से कम सीटें…मोदी-शाह को..’

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण से पहले ही चुनावी गणित के साथ-साथ चुनाव के बाद की गणित पर भी विचार शुरू हो गया है. भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों में ये बात सुनने को मिल रही है कि दोनों ही दल बहुमत से दूर रह सकते हैं. भाजपा के नेता तो ऊपर-ऊपर ये दावे कर रहे हैं कि उनकी पार्टी बहुमत हासिल कर रही है लेकिन कई भाजपा नेता भी मान रहे हैं कि पार्टी तो बहुमत नहीं हासिल कर सकेगी गठबंधन कर लेगा.

कैमरे के पीछे लेकिन भाजपा नेता भी इस बात पर काम कर रहे हैं कि उनकी पार्टी को अगर बहुमत न मिले तो क्या करें. इसको लेकर आरएसएस ने भी अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दी है. आरएसएस का एक बड़ा गुट इस कोशिश में है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह का होल्ड भाजपा पर से कम किया जाए और इसके लिए वो किसी और व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने की इच्छुक है. परन्तु ये तभी हो पायेगा जब भाजपा को पर्याप्त सीटें मिलती हैं.

जिस व्यक्ति का नाम इसमें सबसे पहले नंबर पर आ रहा है वो हैं भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी. गडकरी को आरएसएस का क़रीबी माना जाता है वहीँ वो मोदी-शाह का विरोध भी करते पाए जाते हैं. वो अक्सर कांग्रेस के नेताओं की भी तारीफ़ कर देते हैं. इन सब वजहों से गडकरी लगभग हर दल में एक विशेष स्थिति रखते हैं जिसमें राजनीतिक विरोधी भी उनका सम्मान करते हैं. इस बारे में वसंतराव नाइक शेती स्वावलंबन मिशन के चेयरमैन किशोर तिवारी लम्बे समय से गडकरी का नाम आगे बढ़ा रहे हैं.

तिवारी लेकिन अब ये सोचते हैं कि भाजपा की 140 सीटें कम होने वाली हैं. उन्होंने कहा,”बीजेपी को 140 सीटें कम आने वाली हैं, ऐसे में नहीं लगता कि गडकरी पीएम बन पाएंगे।“ तिवारी ने पिछले साल तीन राज्यों में भाजपा की हार हो जाने के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत और महासचिव भैयाजी सुरेश जोशी को पत्र लिखकर कहा था कि नरेंद्र मोदी की जगह नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री पद के लिए सामने लाना चाहिए. तिवारी ने कहा कि अगर गडकरी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाता तो अधिक फ़ायदेमंद होता.

उन्होंने दावा किया कि मोदी-शाह ने भाजपा को अपने तक सीमित कर लिया है. उन्होंने कहा,”राजनाथ सिंह जैसे दिग्गज नेता भी लाचार हो गए हैं। पार्टी चापलूसी के दौर से गुजर रही है। आरएसएस की विचारधारा और मोदी-शाह की दबंग विचारधारा में तालमेल नहीं है। पार्टी के लिए मोदी-शाह के जोर से चिल्लाने का प्रयोग भी घातक सिद्ध हो रहा है। ग्रामीण भारत में मोदी का जनाधार कम हुआ है। मोदी-शाह ब्रांड बीजेपी को ले डूबेगा। फिलहाल जो स्थिति दिख रही है उसमें महागठबंधन की सरकार बन सकती है।”