कोरो’नावाय’रस का ये सं’कट हिन्दुस्तान में सबसे ज़्यादा महाराष्ट्र में देखने को मिला है। यहां इस वाय’रस से संक्र’मित लोगों की संख्या लगभग 52,667 हो चुकी है। जिसमें से लगभग 1,695 लोगों की मौ’त हो चुकी है। ऐसे में महाराष्ट्र से खबर आई है कि मंगलवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बीजेपी ली’डर देवेंद्र फडणवीस के उन दावों को खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रवासी मज’दूरों पर 300 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

उनके इस दावे पर गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ट्वीट करते हुए कहा कि “देवेंद्र फडणवीस ने यह दावा कर रहे हैं कि केंद्र सरकार प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए 300 करोड़ रुपये ख’र्च कर रही है, ये पूरी तरह से गल’त और भ्र’मित करने वाला है।” अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने लिखा कि “हर एक प्रवासी श्रमिक के टिकट की लागत का वहन मुख्यमंत्री रा’हत कोष (CM Relief Fund) के जरिए किया जा रहा है।” बताया जा रहा है कि देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के बताया था कि महाराष्ट्र में केंद्र सरकार की ओर से काफी म’दद दी जा रही है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सरकार गरीब कल्याण पैकेज के जरिए राज्य में 4492 रुपये का अनाज बंटा गया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा भी सरकार ने श्रमिक ट्रेन के लिए 300 करोड़ रुपये दिए। फडणवीस ने कहा कि 10 लाख पीपीई किट्स और 16 लाख एन-95 मा’स्क भी महाराष्ट्र को दिए गए हैं।

बीजेपी के इस नेता ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा की गई 20 लाख करोड़ के आ’त्मनि’र्भर पैकेज की घोषणा के चलते महाराष्ट्र को 78 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि “केंद्र पहले ही महाराष्ट्र को कोरोना वायरस की म’हामारी से ल’ड़ने के लिए 28,104 करोड़ रुपये की राशि दे चुका है। केंद्रीय पैकेज में राज्य का हिस्सा 1.65 लाख करोड़ रुपये का है। सरकार को प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए साहसिक कदम उठाने जरूरत है।” कोरो’नावायरस की इस महामा’री से निप’टने के तरीके को देखते हुए फडणवीस ने कहा, “लोगों को एंबुलें’स तक नहीं मिल रही अस्पता’लों में बिस्तरों फडणवीस ने कहा, ‘‘लोगों को एंबुलेंस तक नहीं मिल रही। अस्पता’लों में बिस्तरों की संख्या अप’र्याप्त है. निजी अस्पता’ल लोगों से भारी कीमत वसूल रहे हैं ऐसा लगता है कि प्रशासन पर से सरकार का नियं’त्रण समा’प्त हो गया है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published.