इटावा. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से भले ही शिवपाल यादव अलग हो गए हों लेकिन उनसे मिलिए, बात करिए तो समाजवादी पार्टी के नेता की झलक आज भी मिलती है. ऐसा लगता है कि वो आज भी अपने आपको सपा से अलग नहीं कर पाए हैं. इस तरह की चर्चाएँ भी लगातार चल रही हैं कि जल्द ही शिवपाल फिर से अपने भतीजे अखिलेश यादव की सपा में आयेंगे. शिवपाल यादव ने इस बीच एक बड़ा बयान दिया है.

उन्होंने दावा किया कि सपा से अलग होने के बाद उनको भाजपा की ओर से ऑफर मिला था लेकिन उन्होंने भाजपा ज्वाइन करना ठीक नहीं समझा और ख़ुद की पार्टी बनाई. शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि बेशक उन्होंने अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी का गठन कर लिया हो, लेकिन आज भी उनके अपने लोग उनके दल को बीजेपी की बी टीम बता कर तरह-तरह की चर्चाएं करते हैं.

उन्होंने कहा कि उनका निर्णय ग़लत नहीं है. बहुत सोच समझ कर उन्होंने पार्टी बनाने का निर्णय लिया. आज बीजेपी की जो स्थिति है वह किसी से छुपी नहीं है. हर ओर पार्टी का विरोध जनता करने लगी है. 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पार्टी प्रसपा और सपा के गठबंधन की संभावनाओं पर इशारों में टिपण्णी की. उन्होंने कहा कि बसपा- सपा के बीच गठबंधन हो चुका है और नतीजा भी सबके सामने आ चुका है. अब अगर बसपा-भाजपा की दोस्ती हो रही है, तो फिर भाजपा को क्या फायदा पहुंचेगा यह तो तब पता चलेगा जब नतीजे आएंगे.

उन्होंने बयान दिया कि बहन जी (मायावती) के बारे में हर कोई बहुत अच्छे से जानता है कि उनका कैसा इतिहास रहा है.. नेताजी को भी उन्होंने बदनाम किया जबकि नेताजी आज की तारीख में हर दल के लिए सर्वमान्य नेता बने हुए हैं. बीजेपी से मिलकर बीएसपी ने तीन बार सरकार बनाई. अब अगर बसपा के विधायक टूट रहे हैं तो फिर इसमें किसी और का क्या कुसूर है. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि बहन जी के विधायक टिकट वितरण और शोषण की वजह से उनसे दूर जा रहे हैं. जब उनके खुद के विधायक उनसे अलग भाग रहे हैं तो फिर दूसरों पर आरोप लगाने से फायदा क्या. उन्हें किसी दूसरे पर आरोप नहीं लगाना चाहिए, बल्कि अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए.

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