CDS बिपिन रावत के निधन पर पाकिस्तानी सैनिको के ट्वीट क्यों बना चर्चा का विषय, यकीन नही करेंगे…

December 9, 2021 by No Comments

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत (CDS General Bipin Rawat), उनकी पत्नी मधुलिका और कई अन्य वरिष्ठ सैन्य कर्मियों को ले जा रहे भारतीय वायु सेना (IAF) के हेलिकॉप्टर के तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद पूरे देश में शोक की लहर है राजनेता, सेना के जवान और आम नागरिक सीडीएस जनरल बिपिन रावत को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

वही दोसरी तरफ सीमा पर से भी पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता बाबर इफ़्तिख़ार ने ट्वीट में लिखा, “ज्वांइट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कमेटी के चेयरमैन जनरल नदीम रज़ा और सेनाध्यक्ष जनरल क़मर जावेद बाजवा, जरनल बिपिन रावत और उनकी पत्नी की एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई त्रासद मौत पर शोक व्यक्त करते हैं।

भारत के पूर्व युद्ध के ब्रिगेडियर आरएस पठानिया ने सीडीएस रावत के निधन की खबर आने के बाद ट्विटर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की भारतीय दिग्गज ब्रिगेडियर आर एस पठानिया ने 8 दिसंबर को ट्वीट किया था आपको सलाम, सर जय हिंद, आरएस पठानिया के इस ट्वीट के बाद पाकिस्तानी सेना के पूर्व मेजर आदिल राजा ने सीडीएस रावत की मौत पर शोक व्यक्त किया उन्होंने लिखा, “सर कृपया मेरी हार्दिक संवेदना स्वीकार करें।

उसके जवाब में पठानिया ने कहा, धन्यवाद आदिल एक सैनिक से यही उम्मीद की जाती है आपको सलाम आदिल रजा, जो पाकिस्तान एक्स सर्विसमैन सोसाइटी (PESS) के प्रवक्ता हैं उन्होंने पठानिया को जवाब देते हुए लिखा ऑफ-कोर्स सर, एक सैनिक के रूप में यह करना अच्छी बात है फिर से आपके नुकसान के लिए खेद है सर हमारे यहां पंजाबी लोककथाओं में वे कहते हैं दुश्मन मरे ते खुशियां न मनवू, कदय सजना वी मर जाना” अर्थ: “अपने दुश्मनों की मौत का जश्न मत मनाओ क्योंकि किसी दिन दोस्त भी मर जाएंगे।

 

इंसानियत पर इस खूबसूरत सोच का जवाब देते हुए पठानिया ने लिखा, ‘फिर से शुक्रिया आदिल मैं पंजाबी समझता हूं और बोलता भी हूं हम युद्ध के मैदान में दुश्मन हैं इसके अलावा अगर हम दोस्त नहीं बन सकते तो एक-दूसरे के प्रति सभ्य रहें इस मौके पर पाकिस्तानी मीडिया सरकारी अधिकारियों के साथ – साथ तमाम पेशों और समाज के लोगों की ओर से जनरल रावत के असमय निधन पर संवेदना जताई जा रही है।

ट्विटर यूज़र सलमान ख़ान लिखते हैं, “हम कभी भी अपने दुश्मन की मौत पर जश्न नहीं मनाते जब तक कि वह मौत हमारे ख़िलाफ़ युद्ध के मैदान पर न हुई हो. परिवारों के प्रति हमारी संवेदना है।

 

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