चिराग पासवान को मिला नीतीश कुमार के प्रबल विरोधी का साथ, अब मांझी को भी दिया…

July 1, 2021 by No Comments

बिहार की सियासत में इन दिनों काफी उठापटक मची हुई है। हर दिन बिहार की राजनीति नई करवटें ले रही है। बीते दिनों से लोक जनशक्ति पार्टी के अंदर मचा घमासान अब किसी से छुपा नहीं रह गया है। चिराग पासवान की ताजा पशुपति भारत सहित पांच सांसदों के पार्टी को तोड़ कर अलग हो जाने के बाद पार्टी अध्यक्ष को बड़ा झटका लगा था।

आपको बता दें कि लोक जनशक्ति पार्टी से 5 सांसद तो अलग हुए हैं। इसके साथ ही पार्टी के इकलौते विधायक ने भी साथ छोड़ कर जनता दल यूनाइटेड का दामन थाम लिया था। ऐसे में चिराग पासवान बिल्कुल अकेले ही रह गए हैं। जिन्हें किसी का साथ नहीं मिल रहा है।

बताया जा रहा है कि ऐसे में अकेले बचे चिराग नए सियासी समीकरण तलाशने में जुट गए हैं बिहार के ही जहानाबाद से पूर्व सांसद और भारतीय सबलोग पार्टी के प्रमुख डॉ अरुण कुमार चिराग के समर्थन में खुलकर उतर गए हैं।

अरुण कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रबल विरोधी माने जाते हैं। ऐसे में उन्होंने चिराग पासवान को खुलकर अपना समर्थन दिया है। माना जा रहा है कि अरुण कुमार के चिराग पासवान का खुलकर समर्थन करने के बाद यह दोनों बड़े नेता एक साथ आ सकते हैं।

चिराग पासवान आने वाले दिनों में पूरी द’लित समुदाय का देश का सबसे बड़ा चेहरा बन सकते हैं। दरअसल 5 जुलाई को लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय रामविलास पासवान की जयंती है। इस मौके पर चिराग पासवान की प्रस्तावित बिहार यात्रा को पूरा करने का अरुण कुमार द्वारा समर्थन किया गया है। नीतीश कुमार को बिहार से हटाने के लिए आने वाले दिनों में जरूरत पड़ी तो अपने पार्टी को चिराग के पार्टी में मर्ज भी कर लेंगे।

पूर्व सांसद अरुण कुमार ने चिराग का खुलकर समर्थन करने की घोषणा करते हुए हम प्रमुख जीतन राम मांझी को भी साथ आने का न्योता दिया है। अरुण कुमार ने कहा कि जीतन राम मांझी गांव और गरीबों के अच्छे नेता हैं। इसलिए कभी-कभी सरकार की खामियों को भी खुलकर सामने रखते हैं। ऐसे मौके पर सभी को साथ आकर बिहार को मजबूत बनाना चाहिए।

पूर्व सांसद अरुण कुमार ने चिराग का साथ देते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए इस्तीफे की मांग कर डाली। अरुण कुमार ने कहा कि अब समय आ गया है कि नीतीश कुमार इस्तीफा देकर घर बैठे और अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ें, क्योंकि बिहार उनसे नहीं संभल रहा है।

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