चिराग पासवान का बड़ा बयान, ”नीतीश ने अपने उन करीबी नेताओं को भी नहीं बख्शा”, जिन्होंने उनके…

July 10, 2021 by No Comments

बिहार के लोक जनशक्ति पार्टी में टूट के बाद चिराग पासवान को एक के बाद एक बड़े झटके मिल रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी ने भी चिराग को सियासी धोखा दिया है। जिसकी शायद उन्हें कभी भी उम्मीद नहीं थी।

दरअसल केंद्रीय कैबिनेट विस्तार में भाजपा ने पशुपति पारस को मंत्री पद दे दिया है। इसे पहले चिराग पासवान यह कह चुके थे कि अगर ऐसा किया जाता है। तो वह कोर्ट का रास्ता खटखटाएंगे। इसी बीच चिराग पासवान ने पशुपति पारस को सदन में पार्टी के नेता के रूप में मान्यता देने संबंधी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था।

अब खबर सामने आई है कि शुक्रवार को कोर्ट ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया है। पशुपति पारस ने बुधवार को ही कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली थी जिसका चिराग पासवान द्वारा काफी विरोध किया गया था। चिराग पासवान की इस याचिका को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा, ‘मुझे इस याचिका में कोई दम नजर नहीं आ रहा।’

गौरतकब है कि अदालत इस मामले में चिराग पासवान पर जुर्माना भी लगाना चाहती थी लेकिन उनके वकील के अनुरोध करने के बाद उसने ऐसा नहीं किया। बता दें कि इस याचिका में लोकसभा में जन लोकशक्ति पार्टी के नेता के रूप में पशुपति कुमार पारस का नाम दिखाने वाले अध्यक्ष के 14 जून के परिपत्र को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।

इसमें यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया था कि चिराग पासवान का नाम सदन में पार्टी के नेता के रूप में दिखाते हुए एक शुद्धिपत्र जारी किया जाए। चिराग पासवान ने गुरुवार को आरोप लगाया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सिर्फ एक सीट के लिए समझौता कर अपनी पार्टी जदयू में भारी असंतोष पैदा कर दिया है।

राज्यव्यापी ‘आशीर्वाद यात्रा’ के क्रम में बेगूसराय पहुंचे चिराग ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह भी दावा किया, ‘‘ नीतीश उनके बागी चाचा पशुपति कुमार पारस के लिए एक सीट छोड़ने के लिए सहमत हो गए, जिसका उनका एकमात्र उद्देश्य मुझे नीचा दिखाना था.’’

जमुई के सांसद चिराग ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘क्या मुझ जैसे किसी व्यक्ति के लिए इससे बड़ी कोई उपलब्धि हो सकती है, जो उनके सामने एक बच्चा है और जिसकी उम्र नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर से कम है.’’ उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के बेहद करीबी कहे जाने वाले जिन नेताओं ने उनकी पार्टी को तोड़ने का काम किया, नीतीश ने उन्हें भी नहीं बक्शा।

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