पिछली बार इस राज्य में कांग्रेस का नहीं खुला था खाता, अब भाजपा को दे रही है काँटे की ट’क्कर…

लोकसभा चुनाव का अब अंतिम चरण ही रह गया है। इस चरण में हर पार्टी ये सोच रही है कि जो कमी पिछले चरणों में रह गई हो वो इसमें पूरी कर ले, इसीलिए प्रचार प्रसार ज़ोर शोर से चल रहा है। हिमाचल प्रदेश में भी अब चुनावी प्रचार पूरी तेज़ी से चल रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश की चारो लोकसभा सीटों पर भाजपा को जीत हासिल हई थी। इस बार लेकिन स्थिति कुछ दिलचस्प नज़र आ रही है।

कांग्रेस ने इस बार अपनी रणनीति में कई तरह के बदलाव किए हैं। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर दावा कर रहे हैं कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में सभी 4 सीटें जीतेगी वहीं कांग्रेस की ओर से भी इसी तरह के दावे हो रहे हैं। पंडित सुखराम और उनके बेटे आश्रय शर्मा के कांग्रेस में आ जाने से मंडी लोकसभा सीट पर कांग्रेस की स्थिति मज़बूत हो गई है। आश्रय को कांग्रेस ने मंडी से प्रत्याशी बनाया है।

भाजपा नेता और मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर भी यहीं से आते हैं लेकिन लोकल लेवल पर सुखराम काफ़ी पॉपुलर हैं। शिमला सीट पर इस समय भाजपा के वीरेंद्र कश्यप सांसद हैं लेकिन इस बार पार्टी ने सुरेश कश्यप को टिकट दिया है. वहीँ कांग्रेस ने इस सीट धनी राम शाण्डिल को टिकट दिया है. शिमला एक ऐसी सीट है जहां पर सीपीएम के भी कुछ वोट माने जाते रहे हैं. शाण्डिल भी यहाँ काफ़ी प्रभावी माने जाते हैं. हमीरपुर से अनुराग ठाकुर सांसद हैं. इस बार भी वो भाजपा के टिकट पर चुनाव लद रहे हैं.

क़द्दावर भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग उम्मीद कर रहे हैं कि वो इस चुनाव में भी जीत हासिल करेंगे लेकिन कांग्रेस ने यहाँ से रामलाल ठाकुर को प्रत्याशी बनाया है. रामलाल भी क़द्दावर नेता माने जाते हैं और भाजपा के लिए भारी सिरदर्द हो सकते हैं. काँगड़ा से भी भाजपा के ही सांसद हैं. शांता कुमार पिछले चुनाव में यहाँ बड़े अंतर से जीते थे, इस बार भी उनके पक्ष में माहौल होने की ख़बर है.

चारों सीटों की बात करें तो मंडी में कांग्रेस मज़बूत लग रही है और साथ ही शिमला में भी कांग्रेस को थोड़ा सा एज है लेकिन काँगड़ा में भाजपा मज़बूत दिख रही है. हमीरपुर में भाजपा को एज माना जा सकता है. कुल मिलकर हिमाचल प्रदेश में इस बार काँटे का मुक़ाबला दिख रहा है लेकिन भाजपा को एंटी-इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ सकता है. असल में इसमें सबसे दिलचस्प बात ये है कि कांग्रेस 2009 में भी यहाँ से एक ही लोकसभा सीट जीती थी, इस बार स्थिति कांग्रेस के पक्ष में बेहतर नज़र आ रही है.