नई दिल्ली: शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने राजस्थान की गहलोत सरकार के 11 महीने के सफ़र को सफल साबित करते हुए इस पर जनता की मोहर लगा दी है। बीजेपी के मुख्य मुद्दे जिन्हें वह सफलता की गारंटी मानकर चल रही थी सब फ़ेल हो गए हैं और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जादूगरी के सामने बीजेपी की एक ना चली।

कांग्रेस ने बीजेपी को शहरी निकाय चुनावों में ज़ोरदार पटखनी दी है। इन नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि शहरी जनता के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी छवि बनाने में सफल रहे हैं। राजस्थान की गहलोत सरकार के एक साल पूरा करने के पहले ही मिली इस बेमिसाल जीत ने मुख्यमंत्री का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। शहरी निकायों में गहलोत सरकार को मिली इस सुखद जीत के पीछे का मुख्य कारण भी उभर कर सामने आया है। जो है ईडब्ल्यूएस आरक्षण में संपत्ति का प्रावधान हटा दिया जाना।

गहलोत के इस ऐतिहासिक फ़ैसले ने सामान्य वर्ग के युवाओं को कांग्रेस की तरफ आकर्षित किया। और युवाओं ने बड़ी संख्या में कांग्रेस को वोट दिया। शहरी निकायों में मिली इस जीत के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 11 महीने पुरानी सरकार को और ज़्यादा मजबूती मिली है। और कांग्रेस के सत्ता समीकरण में यह जीत बहुत मायने रखेगी। इस जीत ने मुख्यमंत्री गहलोत को जनता और अपनी पार्टी दोनों में ही कद्दावर साबित किया है।

कांग्रेस ने कुल 961 सीटें जीती हैं जबकि भाजपा ने 737 सीटों पर जीत हासिल की है. 386 निर्दलीय भी जीते हैं. अन्य दलों की बात करें तो बहुजन समाज पार्टी ने भी ठीक प्रदर्शन किया है. पार्टी ने यहाँ 16 सीटें जीती हैं जबकि माकपा ने भी 2 वार्डों में जीत हासिल की है. एनसीपी ने भी 3 सीटें जीती हैं. आपको बता दें कि उपमहापौर/उपाध्यक्ष पदों के लिए मतदान 27 नवंबर, बुधवार को होगा।

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