इस समय देश के पाँच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की चर्चा है. सबसे अधिक चर्चा तो उत्तर प्रदेश की हो रही है. इसका सबसे अहम् कारण ये है कि उत्तर प्रदेश आबादी के लिहाज़ से भारत का सबसे बड़ा राज्य है. यहाँ सबसे अधिक लोकसभा सीटें हैं और ऐसे में ये राज्य बहुत अहम् हो जाता है. यहाँ मेन मुक़ाबला सपा और भाजपा के बीच है.


जहां उत्तर प्रदेश अहम् है वहीं बाक़ी जो चार राज्य हैं वो भी बेहद ख़ास हैं. इनमें से देश के पश्चिम में पड़ने वाला गोवा भी महत्वपूर्ण है. गोवा में कांग्रेस और भाजपा के बीच यूँ तो मुख्य लड़ाई है लेकिन इस छोटे राज्य में कई छोटी पार्टियाँ भी हैं जो किसी का खेल बिगाड़ भी सकती हैं या फिर बना भी सकती हैं.

यहाँ कई गठबंधन भी देखने को मिल रहे हैं. गोवा में ल’ड़ाई कांग्रेस, भाजपा, आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियों के बीच है लेकिन महाराष्ट्र की दो बड़ी पार्टियाँ भी यहाँ अपनी किस्मत का दाँव लगाने को तैयार बैठी हैं. गोवा में एनसीपी और शिवसेना दोनों ने गठबंधन करके चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है. एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार के तहत सत्ता में हैं.

शिवसेना और एनसीपी ने कांग्रेस से बात करने की कोशिश की थी लेकिन कांग्रेस ने उनके प्रस्ताव पर कोई सही प्रतिक्रिया नहीं दी. गोवा में कांग्रेस ने इन दलों से किनारा कर लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि हमने कांग्रेस को संयुक्त रूप से गोवा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन वह व्यर्थ ही रहा। उन्होंने न तो हां कहा और न ही इनकार किया।

राकांपा और शिवसेना संयुक्त रूप से गोवा चुनाव लड़ेंगे। सभी 40 सीटों पर नहीं, बल्कि पर्याप्त संख्या में। पहली सूची कल जारी हो सकती है, उसके बाद अन्य सूचियां जारी करेंगे। इस बीच कांग्रेस ने गोवा में पांच और उम्मीदवारों का एलान कर दिया है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि ये कांग्रेस का दुर्भाग्य है कि वो हमसे गठबंधन नहीं कर पायी.

उन्होंने कहा कि शिवसेना और एनसीपी गठबंधन गोवा में अपनी ताक़त दिखा देगा, हमारी पार्टी सत्ता में आएगी.दरअसल, राज्य में 14 फरवरी को 40 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव होना है। मतों की गिनती चार अन्य राज्यों- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर के साथ-साथ 10 मार्च को होगी।