कांग्रेस से लगातार मीटिंग करने वाले प्रशांत किशोर को तेजस्वी यादव ने ये क्यूँ कहा…

पटना: पिछले दिनों प्रशांत किशोर की कांग्रेस पार्टी से मीटिंग्स बड़ी चर्चा में रहीं, इसके बाद चर्चा इस बात की रही कि कांग्रेस से उनकी बात नहीं बन पायी. असल में 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस से प्रशांत किशोर बात कर रहे थे. किशोर ने एक प्रेजेंटेशन तैयार की थी जिसके ज़रिए उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को बताया कि उनकी पार्टी को किस दिशा में काम करने की ज़रूरत है.

प्रशांत किशोर को देश का सबसे आला राजनीतिक रणनीतिकार माना जाता है. 2014 लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा के साथ चुनाव मैनेजमेंट का काम किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेहतर छवि और गुजरात मॉडल दोनों पर किशोर ने बारीकी से काम किया था. किशोर ने इसके बाद कई विधानसभा चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए सलाहकार की भूमिका निभाई.

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अलावा प्रशांत किशोर लगभग हर बार कामयाब हुए. उन्होंने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए यही भूमिका निभाई और भाजपा अपना पूरा दमख़म लगाकर भी चुनाव जीत नहीं पायी. प्रशांत ने बीच में सक्रिय राजनीति में भी क़दम रखा था और बिहार की जदयू ने उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका दी थी.

हालाँकि जदयू के साथ उनका ये साथ चल नहीं पाया. हाल ही में कांग्रेस और प्रशांत किशोर के बीच लम्बी वार्ता हुई और लगा कि वो कांग्रेस के साथ चले जाएँगे. अंतिम समय में कांग्रेस और प्रशांत किशोर में बात नहीं बन पायी. सूत्र बताते हैं कि किशोर चाहते थे कि उनकी जवाबदेही सिर्फ़ कांग्रेस अध्यक्षा के लिए हो जबकि कांग्रेस इस बात को लेकर राज़ी नहीं थी.

जानकार मानते हैं कि अभी भी कांग्रेस और प्रशांत किशोर की बात पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है. परन्तु प्रशांत किशोर इससे इतर भी काम करने में लग गए हैं. किशोर ने एलान किया है कि वो पूरे बिहार में पदयात्रा करेंगे. उन्होंने कहा कि ये यात्रा 3000 किलोमीटर की होगी. उनके इस क़दम से बिहार की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी चर्चाएँ तेज़ हैं.

प्रशांत किशोर ने कहा था कि वो रियल मास्टर्स यानी कि जनता के पास जाना चाहते हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि लालू राज में बिहार के कमज़ोर वर्ग को आवाज़ मिली तो नीतीश राज में भी कुछ कार्य हुए हैं. वो आगे कहते हैं कि इसके बाद भी बिहार आज देश का सबसे पिछड़ा प्रदेश है. उनकी पदयात्रा के एलान और उनके इस बयान पर जदयू और राजद नेता बयान दे रहे हैं.

जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रशांत के बयान को ग़ैर-महत्वपूर्ण बताया है वहीं नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव ने प्रशांत किशोर के बयान को “फ़ालतू” बता दिया. पटना एअरपोर्ट पर पत्रकारों के साथ बात करते हुए तेजस्वी ने कहा,”प्रशांत किशोर के बयान का कोई मतलब ही नहीं है. उस पर क्या प्रतिक्रिया दी जाए. उनके बयान का कोई आधार नहीं है. वो कहां से आए हैं, कहां जाते हैं, कहां बैठते हैं मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है. Who is he? उनका राज्य की राजनीति में अब तक कोई महत्व रहा ही नहीं है. बेवजह उन्हें अहमियत दी जा रही है.”

नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बयानों से ज़ाहिर है कि प्रशांत किशोर को ये दोनों बड़े दल सीरियस नहीं ले रहे हैं. अंदरूनी तौर पर ये भी चर्चा है कि प्रशांत किशोर ने भले ही कांग्रेस न ज्वाइन की हो लेकिन वो कांग्रेस के लिए काम शुरू कर चुके हैं और ये पदयात्रा भी कांग्रेस को फ़ायदा देने के लिए ही होने वाली है.

राजनीतिक विश्लेषकों की राय भी इस विषय पर बंटी हुई है. कुछ विश्लेषक मानते हैं कि प्रशांत किशोर को ज़रूरत से ज़्यादा भाव दिया जा रहा है तो कुछ का मानना है कि किशोर में क्षमता है और वो इस पदयात्रा के ज़रिए ख़ुद को साबित कर सकते हैं.

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