कोरो’ना वाय’रस संक्र’मण दिन ब दिन तेज़ी से बढ़ता जा रहा है और अब भारत मे कोरो’ना संक्रमि’त मरीज़ों की संख्या बढ़ कर 8,49,553 पहुंच गई है। अब तक देश में 22,674 लोगों की इस वाय’रस से जान जा चुकी है। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में भारत सिर्फ तीन हफतों के दौरान ही कोरो’ना के कुल म’रीजों के मामले में छठे से तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। इसी को मद्देनजर रखते हुए सरकार की तरफ से अस्पता’लों में बेड्स की संख्या लगातार बढाई जा रही है। और ज़्यादा से ज़्यादा टेस्ट भी किए जा रहे हैं। लेकिन फिर भी सवाल ये उठता है कि क्या 130 करोड़ लोगों की आबादी वाले भारत जैसे देश में उनके लिए ये सारी मेडिक’ल सुविधाएं पर्याप्त हैं?

कोरो’ना वाय’रस के मामले भारत मे बढ़ कर 8,49,553 हो चुके हैं। यानी इतने लोग कोरो’ना वाय’रस का शिकार हो चुके हैं। और अब तक पूरे देश में कोरो’ना वायरस से 22,674 लोगों की जा’न जा चुकी है। ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है और तक़रीबन हर दिन ढाई लाख सैंपल की जां’च की जा रही है। एक्सपर्टस का मानना है कि अभी भारत में कोरो’ना का पीक आने वाला है। यानी वो दिन जिसमें कोरो’ना के सबसे ज़्यादा मामले सामने आएंगे। लेकिन इसी के चलते डॉक्टर अनंत भान का कहना है कि,भारत में एक नहीं कई पीक आ सकते हैं। उन्होंने ये कहा कि, दिल्ली और मुंबई में पीक आ चुका। अब देश के छोटे शहरों में भी कोरो’ना का पीक दिखने लगा है। डॉक्टर अनंत भान का ये मानना है कि देश में और ज़्यादा टेस्ट होने की ज़रूरत है।

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इसी के चलते कुछ दिनों पहले कहा था कि, टीवी पर दिखाया जा रहा है कि कोरो’ना के कुल मामलों में भारत तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। लेकिन ये भी देखना चाहिए कि जनसंख्या के मामले में हम दूसरे नंबर पर हैं। हमारे यहां हर 10 लाख लोगों पर सिर्फ 538 मामले आ रहे हैं, जबकि दुनिया में ये औसत 1453 है। और वेल्लोर में क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर जयप्रकाश मुलियाल का कहना है कि, भारत में कोरो’ना संक्र’मण की वास्तविक संख्या को जानना ‘बिल्कुल असं’भव’ है, क्योंकि किसी भी तरह की मृ’त्यु के लिए ज्यादातर जगहों पर कोई रिपोर्टिंग तंत्र नहीं है।

भारत मे सभी तरह की स्वास्थ्य से संम्बधित सेवाओं को राज्य सरकार देखती है। बात करे केरल की तो वहां कोरो’ना संक्रमि’त म’रीज़ों को बहुत अच्छी सेवायें दी गयी और बहुत अच्छे से उनका ख्याल रखा गया और इसी के चलते कोरो’ना सेवाओं को लेकर केरल दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल के तौर पर दिख रहा है। लेकिन दूसरी तरफ दिल्ली की काफी आलोचना की जा रही है क्योंकि वहां दिन ब दिन मामलों में इज़ाफ़ा होता जा रहा है। यहां सभी म’रीज़ो के पूरी तरह से टेस्ट भी नही हो रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार को इसमें दखल देना पड़ा जिसके बाद यह पर सुधार आया। जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के एक प्रोफेसर जिष्णु दास के मुताबिक, भारत में राज्यों की केंद्र के साथ कॉर्डिनेशन की कमी है। यहां डेटा का सही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

भारत कोरो’ना को ह’राने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहा है और इस समय भारत मे कोरो’ना से ल’ड़ने के लिए सात अलग-अलग वैक्सीन पर काम हो रहा है। इन सात वैक्सीन में से दो कंपनियों की वैक्सीन की ह्यूमैन ट्रायल भी हो रही है। इस बात की उम्मीद लगाए जा रही है कि अगले साल यानी 2021 तक ये वैक्सीन बन कर तैयार हो जाएगी। दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पुणे में है। नीति आयोग के मुताबिक भारत में हर रोज़ लगभग 1,000 वेंटिलेटर और 600,000 पीपीई किट बनती हैं।

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