आज भारत में लोकतंत्र है,और लोग अपनी सरकार खुद चुनते हैं, जिस को चाहते हैं सत्ता दे देते हैं और जिस को चाहते हैं,सत्ता से बेदखल कर देते हैं.आज सब कुछ जनता के हाथ में है.लेकिन भारत में एक दौर ऐसा भी रहा है. जब यहाँ पर राजा महाराजा हुआ करते थे,और वह अपनी मर्ज़ी से सरकार चलाते थे,उस दौर में कोई चुनाव नहीं होता था.

बल्कि जो राजा हो जाया करता था,उसकी नस्लें राजा हुआ करती थीं.उस जमाने में कुछ राजा ऐसे होते थे,जो अपने काम से लोगों का दिल जीत लिया करते थे वहीँ कुछ ऐसे भी होते थे।

जो चाल चलन से बदनाम हो जाया करते थे, और उनको आज तक लोग उन्हीं के कर्मों से याद करते हैं,जिस ने जैसा काम किया है, उसे उसी तरीके से याद किया जाता है.

उन्हीं राजाओं में से एक राजा था पटियाला रियासत के महाराजा भूपिंदर सिंह, इन के बारे में कहा जाता है कि यह बहुत ही बड़े अय्या श थे. बताया जाता है कि इन की महल में हर दिन रानियाँ बदली जाती थीं. और इनके महल में 365 रानियाँ मौजूद थीं.

जिन से इनके 83 बच्चे हुए.इसके इलावा राजा ने अपने लिए एक ऐसा महल बनाया था, जहां पर किसी को आने की इजाजत नहीं थी, वहां पर सिर्फ वही लोग आ सकते थे, जिन को राजा बुलाते थे और वह भी उन्हें बिना वस्त्र के आना पड़ता था.

महाराजा भूपिंदर सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1891 के पटियाला राजवंश में हुआ था.और कुछ वजह वैसी हुई कि भूपिंदर सिंह को सिर्फ 9 वर्ष की छोटी आयु में ही राजा बना दिया गया था.लेकिन काम काज दुसरे लोग ही देखते थे।

जब यह बड़े हो गए तो खुद ही राज पाट का काम देखना शुरू कर दिया था.बताया जाता है कि पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह की ऐसे तो 365 रानियाँ, थीं

लेकिन उस ने सब को पत्नी का दर्जा नहीं दिया था. बल्कि उनको ऐसे ही रखे हुआ था, उन्होंने सिर्फ 10 रानियों को ही पत्नी का दर्जा दिया था.