CAA का देश भर में विरो’ध हो रहा है वहीं कहा जा रहा है कि इसे NRC के साथ न जोड़ा जाए ये दोनों बिलकुल अल’ग चीज़ें हैं लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है क्योंकि ये दोनों ही बातें एक दूसरे के साथ इस तरह से गु’थीं हुई हैं कि इन्हें अल’ग किया ही नहीं जा सकता। हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे CAA और NRC का आप’स में सम्बं’ध है और क्यों हो रहा है इनका विरो’ध।

जहाँ CAA के अंत’र्गत पड़ोसी देशों पाकि’स्तान, बांग्ला’देश और अफ़ग़ा’निस्तान में रहने वाले अल्पसं’ख्यक समु’दायों को भारत में नागरि’कता देने के सम्बं’ध में छू’ट दी गयी है, जिसका आधा’र ध’र्म को बनाया गया है। इस ऐक्ट के अंत’र्गत ये कहा गया है कि भारत के तीन पड़ोसी देशों पाकि’स्तान, बां’ग्लादेश और अफ़ग़ा’निस्तान के अल्पसं’ख्यक समुदायों हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय को भारत की नागरिकता देने में ढी’ल दी जाएगी।

Citizenship Amendment Act

इन समुदायों के शर’णार्थियों को भारत की नाग’रिकता लेने के लिए भारत में केवल 6 साल रहना ही पर्याप्त होगा। इन्हें नाग’रिकता पाने के लिए ये साबि’त करना होगा कि उनका धा’र्मिक उत्पी’ड़न किया गया है। अगर ध’र्म का आधा’र न हुआ तो उन्हें नाग’रिकता नहीं मिलेगी या ये कहें कि नाग’रिकता की पुरानी श’र्त यानी 11 साल भारत में रहना ज़रूरी होगा। लेकिन इस ऐक्ट में मु’स्लिम समु’दाय को शामिल नहीं किया गया है।

वहीं अब तक असम में लागू और देश भर में लागू होने की घो’षणा वाले NRC के अंत’र्गत उन सभी शर’णार्थियों को देश से बाह’र निका’ला जाएगा जो यहाँ वै’द्य रूप से नहीं रहते और उनके पास भारत की नागरि’कता नहीं है। इस बात की जाँच करने के लिए भारत के नागरिकों को अपनी नागरि’कता सा’बित करनी होगी तभी वो यहाँ रह सकते हैं वरना उन्हें भी अवै’द्य शर’णार्थी मा’नकर देश से निका’ला जा सकता है। कोई इस देश का नाग’रिक है या नहीं ये साबि’त करने के लिए उसे ये बताना होगा कि वो या उसके पू’र्वज देश में 24 मार्च 1971 के पहले से रह रहे हैं।

NRC

ऐसे में इन ए’क्ट्स के ज़रि’ए दोह’रे पह’लू नज़र आ रहे हैं जहाँ एक ओर पड़ोसी देश से ध’र्म को आधा’र बनकर शर’णार्थियों को नागरि’कता देने की तै’यारी है वहीं देश में सालों से रह रहे नागरिकों से उनका अधि’कार छी’नकर उन्हें बाह’र करने की साज़ि’श भी र’ची जा रही है। असम में NRC लागू होने के बाद लाखों लोगों को बांग्ला’देशी शर’णार्थी क़रा’र देकर बाह’र का रास्ता दिखा दिया गया जिनमें न सिर्फ़ मु’स्लिम बल्कि अन्य समु’दाय के लोग भी मौ’जूद हैं।

वहीं अब CAA के अंत’र्गत उनमें से ही मुस्लि’म समु’दाय के लोगों को छो’ड़कर बा’क़ी सब देश की नागरि’कता हासि’ल करने का अधि’कार पाते हैं। ऐसे में देश में ध’र्मनिरपे’क्षता के वातावर’ण को बु’री तरह बिगा’ड़ने की कोशिश है, जिसका विरो’ध हो रहा है। जहाँ कईयों को लग रहा है कि इसके तह’त सिर्फ़ मुस्लि’म समु’दाय का ही नुक़’सान होने वाला है वो इस स्थिति की गम्भी’रता को समझ ही नहीं पा रहे हैं।

Citizenship Amendment Act

सरकार की ओर से बार-बार ये कहा जा रहा है कि CAA से भारत के किसी भी नागरिक को कोई नुक़’सान नहीं होने वाला है लेकिन ये तो तब होगा जब नागरिक ख़ुद को भारत का सा’बित कर पाएँगे। यहाँ ये समझने की ज़रूरत है कि देश में नाग’रिकों की पहचान बताने के लिए बने आधा’र कार्ड, पेन कार्ड, राशन कार्ड, वोटर id, पासपोर्ट कोई भी काग़ज़ात आपके भारतीय नाग’रिक होने की पु’ष्टि के लिए सबू’त नहीं बनते। ऐसे में किसी का भी ख़ु’द को भारतीय ना’गरिक साबित कर पाना उतना ही मुश्कि’ल है जितना किसी शर’णार्थी के लिए है।

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