मुंबई: राजनीति एक ऐसी चीज़ है जिसमें संभावना के आधार पर फ़ैसले लिए तो जाते हैं लेकिन फ़ैसले सही हैं या ग़लत ये वक़्त बता देता है. भाजपा की बड़ी नेत्री और मंत्री पंकजा मुंडे के बारे में कहा जा रहा था कि वो आसानी से चुनाव जीती लेंगी लेकिन परली विधानसभा सीट से उन्हें हार मिली है. प्रचार के दौरान जब उन्हें लगा कि वो एनसीपी प्रत्याशी धनञ्जय मुंडे से पिछड़ रही हैं तो पार्टी ने उनके लिए पूरा दमख़म लगाया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके पक्ष में वोट माँगा लेकिन उनकी जीत न हो सकी.

परली विधानसभा से अपनी चचेरी बहन को हारने वाले धनञ्जय कहते हैं कि वो इससे ख़ुश भी हैं दुःखी भी. उन्होंने जनता का शुक्रिया अदा किया और कहा कि हालाँकि वो अपनी जीत से ख़ुश हैं लेकिन परिवार के एक सदस्य की हार से उन्हें दुःख भी है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ा जबकि भाजपा ने गन्दी राजनीति की.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी प्रमुख अमित शाह और छत्रपति शिवाजी के वंशज उदयनराजे भोसले के उनके खिलाफ प्रचार करने के बावजूद परली के लोगों ने उनका समर्थन किया. उन्होंने कहा, ‘मैं खुश हूं. लेकिन परिवार में बड़ा होने के नाते कहीं न कहीं मैं दुखी भी हूं. चाहे वे मुझे परिवार का हिस्सा माने या नहीं लेकिन खून के रिश्ते कभी नहीं टूटते. मुझे दुख है कि परिवार में किसी की हार हुई है.’

उन्होंने कहा कि वो आने वाले पाँच सालों में सभी वादों को पूरा करेंगे. दूसरी ओर पंकजा मुंडे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस नतीजे की आशा नहीं थी. उन्होंने कहा,”मैं विनम्रता से जनादेश स्वीकार करती हूं. इस परिणाम की उम्मीद ही नहीं की थी. पिछले पांच सालों में किए विकास कामों और लोगों से मिली प्रतिक्रिया को देखते हुए मैंने ऐसे नतीजे की आशा नहीं की थी.”

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