कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी कामयाबी मिलती दिख रही है. भाजपा ने यहाँ बहुत कोशिश की थी लेकिन उसे यहाँ कोई कामयाबी मिलती नहीं दिखी. ख़बर है कि तृणमूल कांग्रेस ने कालियागंज, खड़गपुर और करीमपुर तीनों सीटों पर जीत दर्ज की है. इसके साथ ही एक बार फिर से साफ़ हो गया है कि ममता बनर्जी अभी भी राज्य की सबसे पॉपुलर नेता हैं और उनकी टक्कर पर कोई भी नज़र नहीं आता.

इनमें से दो सीटें तो ऐसी हैं, जहाँ तृणमूल कांग्रेस ने दो दशकों के बाद जीत हासिल की है. वहीं उत्तराखंड की पिथौरागढ़ सीट पर भाजपा आगे बनी हुई है. 25 नवंबर को हुए उपचुनाव की मतगणना गुरुवार सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई थी. खड़गपुर सदर, कालियागंज और करीमपुर के लिए हुए उपचुनाव में 18 उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत का फैसला होना है. इस चुनाव में पश्चिम बंगाल में करीब सात लाख से अधिक मतदाताओं में से 75.34 फीसदी ने वोट डाले थे.

पश्चिम बंगाल में चुनाव में त्रिकोणीय संघर्ष हुआ है. कांग्रेस-माकपा, तृणमूल और बीजेपी के बीच कड़ा चुनावी संघर्ष देखने को मिला है. चुनाव आयोग के मुताबिक पश्चिम बंगाल की तीन सीटों के उपचुनाव में मतदान प्रतिशत 75.34 फीसदी रहा था. महुआ मोइत्रा के कृष्णानगर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद करीमपुर सीट खाली हो गई थी.

खड़गपुर सदर के विधायक के भी इस साल लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद यह सीट रिक्त हुई थी जबकि कालियागंज के कांग्रेस विधायक प्रमथनाथ रे के निधन के बाद यहां उपचुनाव कराना जरूरी हो गया था. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और माकपा तीन वर्षों के बाद इस उपचुनाव में एक साथ लड़ी हैं. भाजपा के नेताओं को उम्मीद थी कि इन तीन में से एक या दो सीटें तो वो जीत ही सकते हैं लेकिन ममता बनर्जी के आगे भाजपा फ़ेल नज़र आई.

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