फैक्ट चेक: क्या नि’धन से पहले दिलीप कुमार ने वक्फ-बोर्ड को दान की 98 करोड़ की प्रॉपर्टी ?

September 7, 2021 by No Comments

इस साल बॉलीवुड के कई दिग्गज सितारों ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। जिनमें से एक हैं। दिलीप कुमार नहीं जो कि बीते काफी समय से बीमार चल रहे थे। अचानक दिलीप कुमार के निधन से उनके फैंस और परिवार स’दमे में आ गया। सोशल मीडिया पर जहां दिलीप कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वही न’फरत फैलाने वाले कुछ लोगों ने ज’हर भी उगला।

दिग्गज नेता दिलीप कुमार के नि’धन के 3 दिन बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर के पोस्ट वा’यरल हुए इन पोस्टों में यह कहा जा रहा था कि दिलीप कुमार और युसूफ खान ने हिं’दू बनकर फिल्मों में नाम कमाया और म’रने के दौरान वो अपने 98 करोड़ की प्रॉपर्टी वर्कअपलोड को दान करके चले गए।

देखते ही देखते सोशल मीडिया पर यह पोस्ट इतना वा’यरल हुआ कि कई लोगों ने इसे सच मान लिया लेकिन सोशल मीडिया पर किए गए इस दावे की पड़ताल में सामने आया की ये खबर झूठ है। दिलीप कुमार के सोशल मीडिया हैंडलर आसिफ फारुकी ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा दिलीप कुमार ने ‘वक्फ-बोर्ड को प्रॉपर्टी या पैसों का ऐसा कोई दान नही किया है।

इतना ही नहीं मुंबई वक्फ-बोर्ड के अधिकारियों का भी कहना है ‘दिलीप साहब की तरफ से ऐसा कोई दान वक्फ-बोर्ड को नहीं दिया गया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर दिवंगत एक्टर दिलीप कुमार का वक्फ-बोर्ड को पैसे या प्रॉपर्टी दान करने का दावा सरासर गलत है।

आपको बता दें कि दिलीप कुमार जिनका असल नाम यूसुफ खान था। 7 जुलाई बुधवार की सुबह नि’धन हो गया। एक्टर के नि’धन पर देश के बड़े बड़े दिग्गज नेताओं ने भी शो’क जाहिर किया। दिलीप कुमार के नि’धन से सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी लोगों ने शोक ज़ाहिर किया।

दरअसल पाकिस्तान के पेशावर शहर के किस्सा ख्वानी बाजार इलाके में जन्में युसूफ खान जिन्हें दुनिया दिलीप कुमार के नाम से जानती है। पाकिस्तान से संबंध रखते थे। उन्हें भारत ने शोहरत दी थी लेकिन उनके दिल में भारत के साथ-साथ अपना शहर और पुश्तैनी घर भी बसता था। एक बार दिलीप कुमार ने कहा था कि, ‘पेशावर में बीता बचपन मेरी जिंदगी के सबसे बढ़िया दिनों में से एक है’।

पेशावर में जन्में दिलीप कुमार को पाकिस्तान की सरकार ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज से नवाजा था। दिलीप कुमार कहते थे, ‘पेशावर में मैं उस समय अपने आसपास की चीजों को देखकर हमेशा उत्सुकता से भरा रहता था।

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