उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर ज़ोरदार प्रचार चल रहा है. इस समय सबसे अधिक गतिविधि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है लेकिन समूचे प्रदेश में ही माहौल चुनावी दिख रहा है. अब चुनाव है तो दल बदल का सिलसिला भी चल रहा है. सूत्रों की मानें तो जल्द ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज बब्बर समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं.

कांग्रेस के बड़े नेता राज बब्बर को लेकर ऐसी ख़बर आ रही है. बब्बर पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. ख़बरों के मुताबिक़ वो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के संपर्क में हैं. राज बब्बर को कांग्रेस ने 30 स्टार प्रचारकों की सूचि में भी नामिल किया था. अगर राज बब्बर कांग्रेस छोड़ते हैं तो ये पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा.

जानकार मानते हैं कि राज बब्बर की आगरा और आस पास के क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. वो आगरा से सासंद भी रह चुके हैं. राज बब्बर ने अपना राजनीतिक सफ़र 1989 में जनता दल से शुरू किया. जनता दल के कमज़ोर पड़ने के बाद वो उसी से बनी एक पार्टी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. राज बब्बर 1994 में राज्यसभा सांसद चुने गए।

1999 के लोकसभा चुनाव में सपा ने उन्हें आगरा से प्रत्याशी बनाया. उन्होंने ये सीट जीत ली और अपनी राजनीतिक हैसियत को मज़बूत किया. 2004 में वह एक बार फिर इस सीट से खड़े हुए और जीते. 2006 में सपा में कुछ आंतरिक मुश्किलें दिखीं. आंतरिक कलह को ख़त्म करने के उद्देश्य से तब सपा ने कुछ नेताओं पर कार्यवाई की.

तत्कालीन सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने फ़रवरी 2006 में राज बब्बर को पार्टी से निलंबित कर दिया. 5 अक्टूबर 2008 को राज बब्बर ने आगरा में एक विशाल रैली की और इसी रैली में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया. नवंबर 2009 में राज बब्बर फ़िरोज़ाबाद लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी खड़े हुए.

उनके सामने कोई और नहीं बल्कि मुलायम सिंह यादव की बहु और अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव खड़ी हुई थीं. राज बब्बर ने डिंपल को 85 हज़ार से भी अधिक मतों से हराया. ये हार सपा के लिए बड़ा झटका मानी गई. 2014 और 2019 में राज बब्बर क्रमशः ग़ाज़ियाबाद और फ़तेहपुर सीकरी से खड़े हुए. मार्च 2015 से लेकर नवम्बर 2020 तक राज बब्बर राज्यसभा सदस्य भी रहे.

कांग्रेस ने 2016 में उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था, वह इस पद पर 2019 तक रहे. अब ख़बर है कि राज बब्बर अपनी पुरानी पार्टी समाजवादी पार्टी में वापिस आ रहे हैं. अगर ये ख़बर सच है तो ये कांग्रेस के लिए तो बड़ा झटका है ही, वहीं ये सपा के पक्ष में माहौल बनाने में मददगार साबित होगा.