हालात चाहे जितने ख़राब हो जाएँ लेकिन हमारे देश में धा’र्मिक ए’कता की मिसालें लगातार सुनने को मिलती रहती हैं. कुछ इसी तरह की मिसाल क़ायम हुई है इस ईद उल अज़हा के मौक़े पर. असल में ईद और सावन के महीने का सोमवार एक ही दिन प’ड़ने की वजह से कई राज्यों में सरकार ने विशेष सुरक्षा इंतज़ाम किए थे. हम बात कर रहे हैं बिहार की जहाँ साम्प्रदा’यिक स’द्भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली है.

बिहार के मुजफ्फरपुर के छाता बाजार में मु’स्लिम परिवारों ने जो किया है वो एक मिसाल बन गया है. यहाँ के मुस्लि’म समाज ने शांति का सन्देश देते हुए जो क़दम उठाया है जो एक नज़ीर बन गया है. मुस्लि’म समाज ने यहाँ १२ अगस्त की बजाय 13 अगस्त को क़ुर्बा’नी देने का सामूहिक फ़ैसला किया है. ज़ी न्यूज़ डॉट कॉम में छपी ख़बर के मुताबिक़ छाता बाजार स्थित गरीबनाथ मंदिर में सावन के सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की पूजा करने पहुंचते हैं।

यहीं पर एक मस्जिद भी है। मस्जिद से भी इस बारे में एक एलान किया गया. छाता बाजार मस्जिद के इमाम मौलाना सईदुज्जमां ने कहा कि यहां आसपास करीब 25 से 30 मु’स्लिम परिवारों के लोग रहते हैं। इनमें से अधिकांश परिवारों ने यहां कुबार्नी के लिए बकरा पहले से खरीद रखा है, लेकिन अब बकरीद की कु’बार्नी सोमवार की जगह मंगलवार को की जाएगी।

उन्होंने कहा, “मुस्लि’म परिवार वालों के कुबार्नी देने के बाद मंदिर में आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता, इस कारण यह फैसला लिया गया। यह फैसला भाईचारा और सामाजिक सौहार्द के लिए सबकी रजामंदी से लिया गया है. उन्होंने कहा कि बकरीद के मौके पर तीन दिनों तक कुबार्नी दी जा सकती है, इसलिए किसी को कहीं कोई परेशानी नहीं हुई। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष दिलशाद अहमद भी मानते हैं कि इस फैसले से समाज में अमन चैन का संदेश गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को बकरीद की नमाज अपने पूर्व निर्धारित समय पर अदा की गई।

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