इस्लामाबाद: पाकिस्तान में राजनीतिक संकट को लेकर कल सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया. अविश्वास प्रस्ताव को निरस्त करने के डिप्टी स्पीकर के फ़ैसले को अदालत ने ग़लत माना. पाँच जजों की बेंच ने एकमत से ये फ़ैसला दिया कि डिप्टी स्पीकर का फ़ैसला ग़लत था और इसके साथ ही अदालत ने नेशनल असेम्बली को बहाल कर दिया.

इतना ही नहीं अदालत ने आदेश दिया कि अविश्वास प्रस्ताव पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी. नेशनल असेम्बली के डिप्टी स्पीकर की रूलिंग ग़लत ठहराए जाने के बाद नेशनल असेम्बली का बहाल होना तो तय ही हुआ साथ ही इमरान ख़ान की सरकार और कैबिनेट फिर से बहाल हो गई. अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना है.

ऐसा माना जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव में इमरान की हार तय है. वहीं अदालत का फैसला विपक्षी दलों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है. पाकिस्तान विपक्ष की दो बड़ी पार्टियाँ PML-N और PPP के कार्यकर्ताओं ने अदालत के फ़ैसले के बाद जश्न मनाया. वहीं विपक्ष की ओर से बयान आया है कि इमरान सरकार अगर अविश्वास प्रस्ताव हार जाती है तो PML-N के नेता और नवाज़ शरीफ़ के भाई शाहबाज़ शरीफ़ को विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाया जाएगा.

जानकार मानते हैं कि संसद में भले इमरान की पार्टी PTI कमज़ोर पड़ गई हो, पब्लिक में अभी भी इस पार्टी के लिए भारी समर्थन है. यही वजह है कि विपक्ष इस समय चुनाव नहीं चाहता. PPP और PML-N दोनों का मानना है कि 4-6 महीने में हालात उनके पक्ष में हो सकते हैं और जिस तरह से अदालती लड़ाई में इमरान की हार हुई है उससे विपक्षी कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं.

अदालत के फ़ैसले ने विपक्ष की उस बात को मज़बूती से जनता के सामने रख दिया है कि इमरान सत्ता के लिए संविधान विरोधी कार्य करने से नहीं चूकते. इमरान की पार्टी चुनाव जल्दी चाहती थी लेकिन अब बाज़ी पलट गई है. पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने भी साफ़ कर दिया है कि delimitation प्रक्रिया शुरू हो जाने की वजह से अभी चुनाव कराना संभव नहीं है.

पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उन्हें चुनाव को निष्पक्ष और सही तरह से कराने के लिए 7 महीने का समय चाहिए ही होगा. कुल मिलाकर इमरान एक ऐसी स्थिति में जा पहुँचे हैं जहाँ वो जाना नहीं चाहते थे. अपनी सत्ता के लिए उन्होंने पाकिस्तान की विदेश नीति को भी असमंजस की स्थिति में डाल दिया. पहले तो इमरान यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान रूस का दौरा करते हैं फिर अमरीका पर गंभीर आरोप लगाते हैं.

हालाँकि न तो वो यूक्रेन-रूस युद्ध में कोई भूमिका निभाने की स्थिति में हैं और न ही वो अपने लगाये आरोपों पर गंभीर ही हैं. इमरान ने जिन विपक्षी नेताओं पर अमरीका से मिले होने के आरोप लगाये उन पर किसी तरह की कार्यवाई करने की बात उन्होंने नहीं की.