बा’बरी म’स्जि’द गिराने के इल’ज़ाम में मु’श्किल में फँ’स सकते हैं कल्याण सिंह, इसलिए बचे थे..

September 9, 2019 by No Comments

दिल्ली: एक समय था जब भाजपा में कल्याण सिंह एक प्रमुख चेहरा थे. नरेंद्र मोदी सरकार में वो राजस्थान के राज्यपाल पद पर नियुक्त हो गए. अब वो इस पद से रिटायर हो चुके हैं. रिटायरमेंट के साथ ही कल्याण सिंह के बारे में ख़बर आ रही हा कि उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली है. ऐसा भी माना जा रहा है कि अब उनकी मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं.

असल में उन पर बाबरी मस्जिद गिराने में अपराधिक साज़िश का मुक़दमा चल सकता है. राज्यपाल के पद पर होने की वजह से उन पर मुक़दमा नहीं चला. 19 अप्रैल 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया था. उस समय अदालत ने ये कहा था कि राज्यपालों को संविधान द्वारा प्रदत्त रक्षा के कारण कल्याण सिंह पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता.

अनुच्छेद 361 के अनुसार राष्ट्रपति और राज्यपालों को पद पर रहते हुए मुकदमों से छूट मिली हुई है. इसके चलते सिंह को तब राहत मिल गई थी. सूत्रों का कहना है कि अब कल्याण सिंह पद पर नहीं रहेंगे तो उन पर मुकदमा चल सकता है. हालांकि, सरकार उन्हें दोबारा अन्य सांविधानिक पद पर नियुक्त दे देती है तो वह बच सकते हैं.

कल्याण सिंह दुबारा भाजपा में शामिल हो गए हैं. आज ही उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली. उन्होंने लखनऊ पहुँच कर भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष से मुलाक़ात की और भाजपा की सदस्यता ली. उनके ऊपर इस तरह के आरोप लगे थे कि उन्होंने बाबरी मस्जिद के गिराए जाने में साज़िश करने की भूमिका निभायी थी.

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