कोरो’ना वाय’रस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है और लगभग सभी देश इसका शिका’र हो चुके हैं और अब भारत भी कोरो’ना वाय’रस  (Pandemic Coronavirus) के संक्रम’ण से तेज़ी से प्रभावित हो रहा है और कोरो’ना संक्रम’ण के मामले देश में बढ़ते जा रहे हैं वही मध्यप्रदेश का जिला इंदौर कोरो’ना वाय’रस की चपे’ट में है शुरुआती दौर से और हॉटस्पॉ’ट बना रहा है और तो और यहां कोरो’ना वाय’रस के म’रीज़ों की संख्या तो ज़्यदा है और इसके साथ साथ यहां का डे’थ रेट (death rate) भी और राज्यों के मुक़ाबले ज़्यादा है और राज्य में ऐसी स्थिति होने के बाद भी ऐसी महामा’री से ल’ड़ने मे वहां जुगाड़ सिस्टम से काम चलाया जा रहा है।

कोरो’ना वाय’रस जैसी इस महामा’री से ल’ड़ने के लिए भी वहां कोई अच्छी सुविधा नही है बताया जा रहा है की इंदौर में कोरो’ना वाय’रस के कोरो’ना सैंपल ले जाने के लिए आइस पैक(ICE PACK) तक कि व्यवस्था नही हैं और बताया ये जा रहा है कि यहां आइस पैक की जगह ठंडे पानी के पैकेट रख कर कोरो’ना  के म’रीज़ों के सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। बताया ये जा रहा है कि कोरो’ना के म’रीज़ों और संदिग्ध म’रीज़ों को ले जाने वाली 108 सर्विस वाली एम्बुलेंस को सार्वजनिक शौचालय की टंकी के पानी से धोया जा रहा है और नेशनल हेल्थ मिनिस्ट्री (NHM) की गाइडलाइंस के मुताबिक एम्बुलेंस को धोने के लिए  1 से 2 प्रतिशत सोडियम हाइपो क्लोराइड घोल (Sodium hypo chloride solution) का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है और ड्राइवर जहा बैठ कर ड्राइविंग करता है उस जगह को भी  हाइपो क्लोराइड घोल (Sodium hypo chloride solution) से साफ किया जाएगा और ये प्रक्रिया हर बार कोरो’ना और संदिग्ध म’रीज़ों को एक बार छोड़ कर आने के बाद हर बार करना ज़रूरी है पता ये चला है कि हाल ही में जब एम्बुलेंस अमेरिका से लौटे प्रवासियों को लेने एयरपोर्ट गयी तो उसमें धूल और गंदगी बहुत थी जिस पर प्रवासियों ने अप्प’ति जताई उसके बाद जब इस बात की तहकीकात हुए तो पता चला कि एम्बुलेंस को हाइपो क्लोराइड घोल (Sodium hypo chloride solutio) के बजाए  शौचालय की टंकी के पानी से धोया जा रहा है। इस मामले की खबर जब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को हुई तो इस मसले पर स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम का कहना है एंबुलेंस का संचालन करने वाली जिगित्सा हेल्थकेयर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।

वही जब आइस पैक ना होने की खबर का मामला स्वस्थ विभाग तक पहुंचा तो रिपोर्ट के मुताबिक पता चला है कि इंदौर में कोरो’ना जांच के लिए स्वस्थ विभाग ने सैंपल कलेक्शन के लिए जेल वाले इस पैक खरिदे है नही। और बताया ये जा रहा है के वैक्सी’नेशन के लिए जो आइस पैक दिए गए थे कुछ समय तक उनका इस्तेमाल हुआ उसके बाद जब ये स्टॉक ख’त्म हो गया तो ठंडे पानी के पैकेट से काम चलाया गया और WHO की गाइडलाइंस के मुताबिक़ ये सैंपल जेल में ले जाने चाहिए। गाइडलाइंस के मुताबिक बताया ये जा रहा है कि नाक और गले से सैंपल ले कर उसको एक कांच की शीशी में सील कर दिया जाता है। शीशी कंटेनर में रखी जाती है फिर कंटेनर को जिप लॉ’क वाले प्लास्टिक के पैकेट में डालकर जार में रखा जाता है और उसका तापमा’न 2 डिग्री से 8 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच में रखा जाता है जिसके लिए आइस पैक इस्तेमाल कीए जाते है और उनको थर्माकोल के बॉक्स में पैक कर दिया जाता है।

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