नई दिल्ली: संविधान के अनुच्छेद 370 को अप्रभावी किए जाने के बाद से ही केंद्र सरकार एक तरफ़ तो अपनी वाह-वाही कर रही है दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे पर आलो’चना कर रहा है कि कई बड़े नेताओं को सरकार ने हिरा’सत में लिया हुआ है. सरकार बार-बार कह रही है कि ये सब भले के लिए किया जा रहा है और आने वाले समय में सब ठीक होगा. सरकार ये भी दावा कर रही है कि ये कश्मीरी जनता के विकास के लिए ही किया गया है. यही वजह है कि सरकार ने श्रीनगर में 12-14 अक्टूबर के बीच इन्वेस्टर्स समिट का एलान कर दिया.

परन्तु अब जो ख़बर आ रही है उसके मुताबिक़ ये इन्वेस्टर्स समिट ट’ल गई है. बताया जा रहा है कि इसकी तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं था. ये भी बताया जा रहा है कि इसको लेकर जल्द ही तारीख़ों का एलान होगा. उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव (वाणिज्य एवं उद्योग) एनके चौधरी ने इन्वेस्टर्स समिट की घोषणा करते हुए कहा था कि उन्हें यकीन है कि राज्य में एक महीने में स्थिति में सुधार होगा.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा था कि अगर मुझे इस पर विश्वास नहीं होता, तो मैं तारीखों की घोषणा नहीं करता. यह आयोजन श्रीनगर में आयोजित किया जाने वाले था. उम्मीद थी कि इस सम्मेलन में आठ देश हिस्सा लेंगे. केंद्र सरकार ने इसी महीने की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता को ख’त्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था.

जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 और 35A के प्रावधानों की वजह से विशेष दर्जा प्राप्त था. सरकार ने ये विशेष दर्जा राज्य से ले लिया है. हालाँकि सरकार का कहना है कि कहने को ये विशेष दर्जा ज़रूर था लेकिन इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों का नु’क़सान ही हुआ था.विशेषज्ञों की राय इस पर बं’टी हुई है.

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