उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से अब तक मिली रिपोर्ट के अनुसार 37 मुस्लिम प्रत्याशी जीतने में कामयाब रहे हैं या लीड लिये हुए थे खबर लिखे जाने तक आपको बता ये आंकड़ा 2017 में विधानसभा होने वाले चुनाव से ज्यादा हैं पिछले चुनाव में ये आंकड़ा सिर्फ 23 था 2022 में विधायक चुने गए मुसलमानों की लिस्ट कुछ इस तरह है।

आजम खान, साहब रामपुर से अब्दुल्ला आजम खान, स्वार से अब्बास मुख्तार अंसारी, मऊ कमाल अख्तर, कांठ से नाहिद हसन, कैराना से हाजी इरफान सोलंकी सिसामऊ से इकबाल महमूद , संभल से आशु मालिक, सहारनपुर से मोहम्मद मुज्तबा फूलपुर से चुनाव जीते हैं ।

मन्नू अंसारी, मोहम्मदाबाद जयउद्दीन रिजवी, सिकंदरपुर से गुलाम मोहम्मद, सिवाल खास से नवाब जान, ठकुराद्वार से असरफ अली खान, थानाभवन से अरमान खान, लखनऊ से आलम बदी, निजामाबाद से तसलीम अहमद, नजीबाबाद से -मौहम्मद नासिर, मुरादाबाद रूरल से मौहम्मद युसुफ, मुरादाबाद से रफीक अंसारी, मेरठ से जियाऊर रहमान कुंदरकी, से सुल्तान बेग, मीरगंज से मोहम्मद आदिल, मेरठ दक्षिण से यासर शाह, बहराइच से महमूब अली, अमरोहा से चुनाव जीते हैं ।

उमर अली खान, बेहट से शाहजिल इस्लाम, भोजपुरा से मोहम्मद फहीम, बिलारी से नसीर अहमद, चमरौवा से नईम उल हसन, धामपुर से सय्यदा खातून, डुमरियागंज से नफीस अहमद, गोपालपुर से मोहम्मद हसन, कानपुर कैंट से शाहिद मंज़ूर, किठौर से अताउर रहमान, बहेडी बरेली से जीत दर्ज की है । मोहम्मदाबाद से मन्नू अंसारी सपा के टिकट पर चुनाव जीते हैं.

इसमें ये बात ध्यान देने वाली है कि ये सभी विधायक समाजवादी पार्टी गठबंधन के टिकट पर चुनाव जीते हैं. इसमें अधिकतर सपा के टिकट पर जीते हैं जबकि कुछ सुभासपा और रालोद के प्रत्याशी भी हैं.

भाजपा के धुरंधरों को सपा ने हराया..

केशव प्रसाद मौर्या के अलावा पार्टी की मृगंका सिंह भी कैराना से चुनाव हार गई हैं. कैराना में हालाँकि सपा के नाहिद हसन के ही जीतने की उम्मीद थी लेकिन भाजपा ने यहाँ सभी बड़े नेताओं को उतार दिया था लेकिन भाजपा चुनाव नहीं जीत सकी. इस सीट के अलावा जिस सीट की सबसे अधिक चर्चा है वो है सरधाना की.

सरधाना से साम्प्रदायिक राजनीति के लिए जाने जाने वाले भाजपा नेता संगीत सोम की हार हुई है. यहाँ से सपा के अतुल प्रधान ने संगीत सोम को पटखनी दी है. अतुल प्रधान को 118573 वोट मिले जबकि संगीत सोम 100373 वोट ही पा सके. अतुल प्रधान की जीत कई मायनों में अहम् है. संगीत सोम को हराकर अतुल प्रधान ने भी अपनी हैसियत बढ़ा ली है वहीं संगीत सोम की हैसियत में गिरावट आनी तय हो गई है.

सपा की इन सीटों पर हुई जीत पार्टी को आने वाले समय में बहुत मज़बूत कर सकता है. वहीं कैराना से नाहिद हसन का जीतना और सरधाना से संगीत सोम का हारना ये साबित करता है कि साम्प्रदायिक राजनीति के दिन अब बहुत नहीं हैं.

शामली की कैराना विधानसभा को भाजपा ने प्रतिष्ठा बनाया हुआ था लेकिन यहाँ उसकी हार हुई है. यहाँ से सपा के नाहिद हसन चुनाव जीते हैं. नाहिद के मुक़ाबले भाजपा की मृगंका सिंह थीं जिन्हें 25 हज़ार से भी अधिक वोटों से हार मिली है. इस सीट पर भाजपा के कई बड़े नेताओं ने प्रचार किया था जबकि नाहिद ख़ुद जेल में हैं. उनकी बहन इकरा हसन ने प्रचार का ज़िम्मा संभाला था.

भाजपा की इस प्रचंड लहर में भी भाजपा के कुछ दिग्गज चुनाव में हार गए. सिराथू से केशव प्रसाद मौर्या को हार मिली है. बड़बोले बयानों के लिए जाने जाने वाले केशव प्रसाद मौर्या उत्तर प्रदेश सरकार में उप-मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनकी हार हो गई है.सपा की डॉ पल्लवी पटेल ने केशव प्रसाद मौर्या को सीधे मुक़ाबले में हरा दिया. पल्लवी को 105838 वोट मिले जबकि मौर्या को 98361 वोट ही मिले.