क्या दिल्ली में भी कांग्रेस करने जा रही है वापिस?, 7 में से 5 सीटें जीतने को लेकर…

छठे चरण का मतदान आज हो गया है. इस चरण में दिल्ली की भी सात सीटों के लिए मतदान हुआ. इस बार दिल्ली में तीन पार्टियाँ प्रमुखता से चुनाव ल’ड़ी हैं. दिल्ली में राज्य की सत्ता पर क़ाबिज़ आम आदमी पार्टी, केन्द्रीय सत्ता पर काबिज़ भाजपा और कांग्रेस तीनों ने पूरा जोर लगाते हुए चुनाव ल’ड़ा है. इस चुनाव में लम्बे समय तक ये चर्चा रही कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन होगा लेकिन नहीं हो सका. ऐसा माना गया कि ये गठबंधन न हो पाना भाजपा के लिए फ़ायदे की बात रही.

दिल्ली को लेकर अलग-अलग कयास देखने को मिल रहे हैं. दिल्ली में चुनाव के बाद से ही सोशल मीडिया पर एक्टिविटी तेज़ हो गई है. कोई कह रहा है कि भाजपा सात की सात सीटों पर अपना परचम लहरा देगी तो कोई ये भी कह रहा है कि कांग्रेस सब सीटें जीत सकती है. इस बीच जो सोशल मीडिया पर अलग-अलग लोगों की राय आ रही है उससे तो यही लगता है कि मुक़ाबला त्रिकोणीय है.

आम आदमी पार्टी भी अपनी ओर से आश्वस्त है कि 3 सीटें तो वो जीत ही रही है और अगर ज़्यादा अच्छा परफॉरमेंस हुआ तो एक दो और बढ़ सकती हैं. भाजपा की बड़ी उम्मीद इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों पूरे बल से चुनाव ल’ड़ी हों. अगर दोनों को वोट अच्छी संख्या में मिला होगा तो भाजपा को इसका फ़ायदा मिलना ही है परन्तु अलग-अलग सीटों पर अलग रूझान माने जा रहे हैं.

सोशल मीडिया पर लगातार कांग्रेस का पक्ष रखने वाले आशीष अवस्थी दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस यहाँ 4 सीटें जीतेगी जबकि भाजपा दो और आम आदमी पार्टी एक सीट निकाल लेगी. उन्हीं की पोस्ट पर नदीम हसनैन कहते हैं कि कांग्रेस महज़ एक सीट ही जीत पाएगी और यही हाल आम आदमी पार्टी का रहेगा जबकि भाजपा बची हुई पांच सीटें जीत लेगी. विरोधी कुमार कहते हैं कि भाजपा 6 जीत रही है, सुनील मिश्रा भी यही कह रहे हैं और साथ ही एक सीट कांग्रेस को दे रहे हैं.

बीजेपी-कांग्रेस

जबकि शैलेन्द्र आज़ाद भाजपा को कोई सीट नहीं दे रहे हैं. इसी प्रकार से अलग-अलग राजनीतिक और जानकार लोग इस बारे में विशेष टिपण्णी कर रहे हैं. ज़्यादातर अनुमान लगाने वाले लोगों को ये लग रहा है कि शीला दीक्षित कांग्रेस की ओर से चुनाव जीतेंगी जबकि आतिशी आम आदमी पार्टी की ओर से भाजपा प्रत्याशी गौतम गंभीर को हारने में कामयाब रहेंगी. मीनाक्षी लेखी भी भाजपा की ओर से चुनाव जीतने की संभावनाओं पर हैं. इसके अतिरिक्त जो सीटें हैं उन पर मुक़ाबला कुछ असमंजस का ही है.