रांची: ‘बदले-बदले से सरकार नज़र आते हैं,घर की बर्बादी के आसार नज़र आते हैं।’ कुछ इसी तरह के हालात इन दिनों एनडीए और उनके घटक दलों के चल रहे हैं। झारखंड चुनाव के समय के मनमुटाव ने एनडीए के सहयोगी दलों और एनडीए के रिश्ते में खटास डाल दी है। झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में एनडीए के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतरे हैं।

वहीं राज्य में बीजेपी की एकमात्र आधिकारिक सहयोगी पार्टी ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) भी अपने अलग ही रास्ते पर चल रही है। एनडीए के सहयोगी दलों के अपनी ढपली अपना राग अलापने की वजह से राज्य में बीजेपी की स्थिति बहुत ही कमज़ोर दिखाई पड़ रही है। जदयू और एलजीपी बिहार राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के सहयोगी दल हैं। झारखंड में आजसू आधिकारिक तौर पर तो अलग नहीं हुई है। लेकिन राज्य की 81 में से 27 सीटों पर अपने ही सहयोगी दल बीजेपी को सीधी टक्कर दे रही है।

इस बीच जदयू ने जमशेदपुर पूर्वी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी व पूर्व सीएम सरयू राय का समर्थन कर बीजेपी की मुश्किलों में इज़ाफ़ा कर दिया है। बता दें कि पूर्व सीएम सरयू राय बीजेपी के सीएम प्रत्याशी रघुवर दास के ख़िलाफ़ ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) खुले तौर पर राय के समर्थन की अपील कर रहा है। जदयू ने राय को समर्थन देने के साथ ही राज्य की 25 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा भी कर दी है।

जदयू के झारखंड अध्यक्ष सल्ख़ान मुर्मू के मुताबिक जदयू छोटे राज्यों में अपना मत प्रतिशत बढ़ाकर साल 2020 तक राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करना चाहती है। इसके अलावा एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने भी झारखंड में बीजेपी की मुश्किलों को बढ़ाते हुए राज्य की 50 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी है। एलजेपी राज्य में बीजेपी के साथ गठबंधन चाहती थी। लेकिन बीजेपी नेताओं का मानना था कि राज्य में पार्टी की कोई पकड़ नहीं है। झारखंड में बीजेपी जदयू और एलजेपी के बीच का यह विवाद निश्चित तौर पर बिहार विधानसभा चुनाव 2020 का गणित बिगाड़ सकता है। 30 नवंबर से 20 दिसंबर तक 5 चरणों में होने वाले झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा 23 दिसंबर को होनी है।`

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