एक तरफ़ महाराष्ट्र में सिया’सी उथ’ल पु’थल चल रही है तो दूसरी ओर कर्नाटक में 15 सीटों के लिए होने वाले उपचु’नाव भी काफ़ी महत्वपूर्ण हैं। 15 सीटों के उपचु’नाव में भाजपा को 6 सी’टें जी’तना ज़रूरी हैं, इससे क’म सीटें होने पर भाजपा की सर’कार गि’र सकती है। यही व’जह है कि कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस के लिए ये चु’नाव महत्वपूर्ण हो गया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरामैया ने कहा कि उन्हें य’क़ीन है कि उनकी पार्टी 15 में से कम से कम 12 सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी 15 में 15 सीटें जीत ले तो कोई हैर’त की बात न होगी। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा होने पर भाजपा सर’कार को इस्ती’फ़ा देना होगा और राज्य में मध्या’वधि चु’नाव होंगे।

दूसरी ओर भाजपा भी दा’वा कर रही है कि जीत उसके पा’ले में आएगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता दा’वा कर रहे हैं कि भाजपा की सर’कार ने पि’छले दिनों जो काम किये हैं उसके बाद जनता उनके प’क्ष में मतदान करेगी। भले ही भाजपा ये कहे कि उसको बड़ी काम’याबी मिलेगी लेकिन उसे मालूम है कि ये चु’नाव उतना आ’सान नहीं है। वहीं जेडीएस कह रही है कि इनमें से वो अधिक’तर सी’टें जीतेगी।

जानकार मानते हैं कि यहाँ भाजपा को बड़ी काम’याबी मिलना मु’श्किल है। भाजपा के टिक’ट पर ल’ड़ रहे पूर्व के कांग्रेस नेताओं को उतना सम’र्थन नहीं मिल रहा जिसकी अपे’क्षा भाजपा कर रही थी। कई जगह तो भाजपा के ही लो’कल नेता पार्टी के उम्मी’दवार का विरो’ध कर रहे हैं। इस पूरे माम’ले में भाजपा का नेतृत्व कार्यकर्ताओं से अपी’ल कर रहा है कि वो एकजुट रहें। कांग्रेस इस बात को अच्छी तरह समझ रही है और इसका ही फ़ा’यदा उठाने की कोशिश कर रही है। देखा जाए तो मुक़ा’बला इस समय क़’रीबी दिख रहा है।

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